8 लाख कीमत की 680 क्विंटल धावड़ गोंद जब्त


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स्टोरी हाइलाइट्स

वाहन चालक द्वारा अपना नाम लखन पिता देवकरण बताया एवं वाहन में धावड़ा गोंद का होना पाया गया। उक्त गोंद संबंधित वैधानिक कागजात के बारे में पूछने पर कोई वैधानिक कागज ना होने की बात वाहन चालक द्वारा कही गई..!!

भोपाल: टिम्बर माफिया के खिलाफ अभियान के दौरान इंदौर वन विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है।  वन संरक्षक पीएन मिश्रा  एवं वन मंडलाधिकारी  प्रदीप मिश्रा जी मार्गदर्शन में चोरल रेंज में एक मिनी ट्रक में 680 किग्रा धावड़ गोंद जब्त किया है।

सूचना प्राप्त हुई थी सुरतीपुरा ग्राम से एक पिकअप वाहन गोंद लेकर रवाना हुआ है। तदोपरांत इंदौर खंडवा मार्ग पर वाहन का पीछा कर तलाई नाका बाईपास पर घेराबंदी कर रोका गया। वाहन चालक द्वारा अपना नाम लखन पिता देवकरण बताया एवं वाहन में धावड़ा गोंद का होना पाया गया। उक्त गोंद संबंधित वैधानिक कागजात के बारे में पूछने पर कोई वैधानिक कागज ना होने की बात वाहन चालक द्वारा कही गई। मौका स्थल पर फोटोग्राफ एंड वीडियो बनाए गए। 

वाहन को जांच हेतु वन परिसर तलाई लाया गया एवं बीट गार्ड तलाई प्रवीण मीणा वनरक्षक द्वारा वन अपराध प्रकरण 587/07 दिनांक 01 अप्रैल 2025 पंजीबद्ध किया गया वाहन टाटा एस रंग नीला क्रमांक MP37GA3270,  धावड़ा गोंद 628 किलोग्राम जप्त किया गया। इसकी बाजार में कीमत 8 लाख से अधिक है। कार्रवाई में अमित निगम, प्रवीण मीणा, पवन कुशवाहा, अल्केश भूरिया, सुभाष कुशवाहा एवं देवेंद्र गुर्जर का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

एक हजार करोड़ का होता है कारोबार

प्रदेश के जंगलों से हर साल करीब एक हजार करोड़ रुपए मूल्य की सिर्फ सलई और धावड़ गोंद चोरी हो रही है। आदिवासियों या मजदूरों से 50 से 100 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी जाने वाली यह गोंद सऊदी अरब में दो हजार रुपए किलो बिकती है। इंदौर के कई व्यापारी सलई गोंद का व्यापार करते हैं। ज्यादा से ज्यादा गोंद निकालने के लिए पेड़ों को खरोंचा जाता है। इस गोंद से गूगल बनता है, जो पूजा-पाठ के अलावा दवाओं में काम आता है।

सलई गोंद का प्रदेश में बड़ा व्यापार है। वैसे यह मालवा अंचल तक ही सीमित नहीं रहा है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी गोंद निकाली जा रही है। इसकी बड़ी मंडी इंदौर में है। जहां के व्यापारी मजदूर लगाकर गोंद निकलवाते हैं।

इंदौर में इकठ्ठा होता है स्टॉक

आसपास के जिलों के जंगलों से निकाली जा रही सलई गोंद इंदौर में इकठ्ठी होती है। यहां व्यापारियों के गोदामों में दो सौ से पांच सौ क्विंटल गोंद का स्टाक मिल जाएगा। वन विभाग की टीम ने फरवरी में कार्रवाई के दौरान इंदौर के एक व्यापारी के गोदाम पर छापा मारा था और बाद में उसी को स्टाक सौंप दिया। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि खंडवा वन वृत्त के तत्कालीन सीसीएफ को हटना पड़ा।

संघ ने किया वनोपज में शामिल

वैसे तो फारेस्ट अफसर वनोपज मानते है पर लघुवनोपज संघ इसे वनोपज नहीं मानता है। जबकि पूर्व के कई सीनियर अधिकारियों ने वनोपज संघ और राज्य शासन को पत्र लिखकर इस सूची में शामिल करने और तेंदुपता और चिरोजी की तरह एकत्रित करने का प्रस्ताव दे चुके किन्तु इन्हें डस्टबिन के हवाले कर चुके है। वनमंत्री रह चुके नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस बात को स्वीकार किया है कि प्रदेश में सलई गोंद का अवैध कारोबार चल रहा है। उन्होंने खंडवा वनवृत्त के तत्कालीन सीसीएफ को हटाए जाने के संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि सलई गोंद का पांच सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार है, लेकिन अधिकारी कार्रवाई नहीं करते।