कांग्रेस ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े ज़मीन विवाद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे OBC विरोधी मानसिकता बताया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि ज़मीन के मुद्दे पर BJP प्रदेश अध्यक्ष ने जाति का मुद्दा क्यों उठाया, और पूछा कि क्या इससे उनकी असली सोच का पता चलता है।
कांग्रेस ने दिल्ली में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े ज़मीन घोटाले के आरोपों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। पार्टी का आरोप है कि उज्जैन में ₹500 करोड़ की ज़मीन CM के सांस्कृतिक सलाहकार के ट्रस्ट को सिर्फ़ ₹1 में ट्रांसफर कर दी गई। साथ ही, उन्होंने BJP के इस दावे को खारिज कर दिया कि यादव को सिर्फ़ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह OBC मुख्यमंत्री हैं।
कांग्रेस ने कहा कि BJP मोहन यादव से जुड़े ज़मीन घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए जाति का मुद्दा उठा रही है। पार्टी ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है और इस मामले की और भी परतें खुलेंगी।
एक जांच में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव, उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के इलाकों में ज़मीन के 137 प्लॉट खरीदे हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 168 एकड़ हैं।
इस मुद्दे पर बात करते हुए, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मोहन यादव व उनकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "आदर्श घोटाले में अशोक चव्हाण ने इसलिए इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि फ़्लैट उनकी सास के नाम पर था, फिर भी यहाँ मीडिया में चुप्पी है। अयोध्या में दान की चोरी और महाकाल के नाम पर ज़मीन की लूट- यह BJP का नया मॉडल है।" कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कार्रवाई की मांग की है।
इस पर बवाब देते हुए BJP ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया है। मध्य प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "मोहन यादव ने 2023 के अपने नॉमिनेशन पेपर में 17 एकड़ ज़मीन की जानकारी दी थी।" आज भी स्थिति लगभग वैसी ही है। पहले यह ज़मीन 68 एकड़ थी, जो अब घटकर 65 एकड़ रह गई है। ज़मीन का पूरा मालिकाना हक मास्टर प्लान लागू होने से पहले का है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस OBC मुख्यमंत्री को निशाना बना रही है। चाहे उमा भारती हों, शिवराज सिंह चौहान हों या अब मोहन यादव - जब भी पिछड़े वर्ग का कोई नेता मुख्यमंत्री बना है, कांग्रेस ने उसे कमज़ोर करने की कोशिश की है।”
कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवाल
₹500 करोड़ की ज़मीन सिर्फ़ ₹1 में क्यों दी गई?
अगर रिपोर्ट गलत है, तो FIR क्यों दर्ज नहीं की गई?
जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से ज़मीन के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने जाति का ज़िक्र करके जवाब क्यों दिया?
मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार द्वारा तेज़ी से खरीदी गई ज़मीन के लिए पैसा कहाँ से आया?
अब तक इन सवालों पर बीजेपी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार ने ज़मीन खरीदी?
क्या यह सच है कि ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा उन इलाकों में है जहाँ विकास परियोजनाएँ बाद में आईं?
क्या सरकार उन सभी परियोजनाओं के लिए कोई समय-सीमा घोषित करेगी?
अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो क्या बीजेपी स्वतंत्र न्यायिक जाँच के लिए तैयार होगी?
क्या मुख्यमंत्री 2023 के बाद उनके परिवार द्वारा खरीदी गई ज़मीन पर श्वेत पत्र जारी करेंगे?
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव से जुड़े ज़मीन के इस विवाद ने राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार का मुद्दा बता रही है, जबकि बीजेपी इसे OBC मुख्यमंत्री के खिलाफ़ साज़िश करार दे रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मामले की जाँच होगी या नहीं। विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है।