भोपाल: प्रदेश के शहरी सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भवन/कॉलोनी/औद्योगिक निर्माण कार्य सतत रुप से हो रहे हैं, परन्तु इनसे श्रम उपकर की कटौति एवं वसूली की कोई प्रक्रिया निर्धारित न होने से व्यपाक स्तर पर उपकर राशि की हानि संभावित है। जबकि पंचायत राज निकायों में भी निर्माण कार्यों की अनुज्ञा जारी करने पर कर्मकार कल्याण उप कर जमा कराया जाना जरुरी है।
इसलिये अब राज्य की श्रमायुक्त रजनी सिंह ने सभी अधीनस्थ श्रम पदाधिकारियों को नये दिशा-निर्देश जारी कर कहा है कि जनपद/जिला पंचायतों से समन्वय स्थापित कर उपकर कटौति की जानकारी तथा कटौति किये गये उपकर को श्रम विभाग के राज्य भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल को अंतरित की जाये और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों हेतु विशेषकर व्यवसायिक परिसर, रेसिडेन्शियल काम्प्लेक्स आदि की भवन अनुज्ञा की सूची प्राप्त कर उपकर निर्धारण की कार्यवाही की जाये एवं जिला कलेक्टर कार्यालय के कॉलोनी सेल से नवीन कॉलोनी सूची प्राप्त कर वसूली की कार्यवाही करें।
उल्लेखनीय है कि यह उप कर निर्माण लगात के 1 प्रतिशत के बराबर होता है जिसे वसूल कर कर्मकार मंडल में जमा कराना होता है जिससे मंडल श्रम कल्याण की सामाजिक सुरक्षा योजनायें बेहतर ढंग से संचालित कर सके। उपकर जमा कराने का दायित्व स्थानीय निकायों को सौंपा गया है। श्रमायुक्त ने अपने ताजा दिशा-निर्देश में साफ तौर पर कहा है कि अधिकारियों द्वारा उपकर निर्धारण का कार्य संतोषप्रद नहीं है।
श्रमायुक्त ने नगरीय निकायों के लिये दिशा-निर्देश में कहा है कि वे भव एवं अन्य निर्माण कार्यों की अनुज्ञा/नक्शा अनुमोदन की स्वीकृति ठेकेदार द्वारा उप कर राशि जमा करने के उपरान्त ही दें। यह उप कर वसूलने के बाद 30 दिन के अंदर कर्मकार मंडल के खाते में जमा कराना अनिवार्य है परन्तु इसका पालन नहीं हो रहा है। नगरीय निकाय निर्धारित राशि से कम जमा करा रहे हैं या वसूली गई राशि विलम्ब से वित्त वर्ष के अंत में जमा करा रहे हैं। 25 मार्च तक उप कर निर्धारण का प्रतिवेदन भेजने के लिये सभी श्रम पदाधिकारियों से कहा गया है।