Lok Sabha Election 2024: केरल में लैटिन चर्च ने अचानक एक सर्कुलर जारी किया है, इससे राज्य में चुनावी समीकरण बदलने की आशंका पैदा हुई है। लैटिन आर्चडायोसिस ने एक सर्कुलर जारी करके देश में अल्पसंख्यकों खासकर ईसाइयों के खिलाफ कथित हमले और कथित विभाजनकारी राजनीति की निंदा की है। 

चर्च के सर्कुलर में आरोप लगाया गया है कि समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा किया जा रहा है, इसके लिए चर्च की ओर से 22 मार्च को उपवास का आह्वान किया गया है। सर्कुलर में आरोप लगाया गया है कि देश में विभाजनकारी राजनीति की वजह से सामाजिक सौहार्द को खतरा है।

यही नहीं, इसने विपक्षी दलों की यह लाइन भी ली है कि देश में 'लोकतंत्र खतरे में' है। दावे के मुताबिक, इन दिनों देश में संविधान के तहत प्राप्त मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इसके अनुसार खासकर चर्च पर 2014 में 147 हमले होने की रिपोर्ट थी, जो कि 2023 में बढ़कर 687 हो गए हैं।

दिलचस्प बात ये है कि यह सर्कुलर तिरुवनंतपुरम के आर्कबिशप थॉमस जे नेट्टो की ओर से जारी किया गया है, जिसमें 22 तारीख को उपवास और प्रार्थन दिवस के रूप में मनाने की बात कही गई है। गौर करने वाली बात ये है कि लोकसभा चुनाव तारीखों की घोषणा के अगले दिन ही यह सर्कुलर सामने आया है।

केरल में बीजेपी पहली बार 'कमल' खिलाने की उम्मीद के भरोसे चुनाव अभियान चला रही है तो इसमें ईसाई वोट बैंक का भरोसा बहुत ज्यादा मायने रख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की 20 लोकसभा सीटों में से भाजपा को डबल डिजिट में सीटें मिलने की भविष्यवाणी की हुई है। ऐसे में लैटिन चर्च की ओर से जारी यह सर्कुलर उसके चुनावी इरादे को झकझोर सकता है।