शिक्षण संस्थानों में हिजाब बैन होगा या नहीं? अब इस पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच फैसला करेगी. कोर्ट में आज दो जजों की बेंच का फैसला अलग-अलग आने के बाद अब इसे तीन जजों की बेंच के पास भेजा गया. न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जबकि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को गलत बताते हुए खारिज कर दिया.
हिजाब पर बैन को लेकर जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया के बीच मतभेद के चलते अब यह मामला बड़ी बेंच के पास भेजा जाएगा. इस बेंच के तीन जज कौन होंगे? इस पर जल्द ही मुख्य न्यायाधीश फैसला लेंगे.
हिजाब मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 22 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. पूरा मामला कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह फैसला इसी साल 15 मार्च को दिया था.
जजों की अलग-अलग राय-
जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना या न पहनना पसंद का मामला है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। न्यायमूर्ति धूलिया ने आगे कहा कि जहां उच्च न्यायालय ने गलत रास्ता अपनाया, उस विवाद को सुलझाने के लिए धार्मिक प्रथाओं का मुद्दा जरूरी नहीं है. यह अनुच्छेद 15 के बारे में था, यह पसंद की बात थी, इससे ज्यादा कुछ नहीं. उन्होंने हिजाब पर से प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया.
न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर सभी 26 याचिकाओं को खारिज कर दिया. जस्टिस गुप्ता ने कहा कि इसपर मेरी अलग राय है. मैंने अपने क्रम में 11 प्रश्न तैयार किए हैं. सबसे पहले, क्या इस अपील को संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए?
अब आगे क्या?
जजों की अलग-अलग राय के चलते अब पूरा मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास जाएगा. अब वे तय करेंगे कि मामले को पूरा करने के लिए तीन जजों की नई बेंच का गठन किया जाए या मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाए.
मामला क्या है?
कर्नाटक में हिजाब विवाद की कहानी पिछले साल 31 दिसंबर से शुरू हुई थी. इसके बाद उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहने 6 छात्राओं को क्लास में आने से रोक दिया गया. जिसके चलते कॉलेज के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया.
5 फरवरी 2022 को कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी किया. इसमें स्कूलों और कॉलेजों में समानता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था को भंग करने वाले ऐसे सभी धार्मिक परिधानों के पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
कर्नाटक सरकार के इस आदेश को हाई कोर्ट ने भी चुनौती दी गई थी. इसके साथ ही छात्रों ने एक याचिका दायर कर शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने की मांग की थी. कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च को इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था.
बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने इस मामले पर 10 दिन तक सुनवाई की. याचिकाकर्ताओं की ओर से 21 वकीलों ने दलीलें दीं. वहीं, सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और कर्नाटक के महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी ने अपनी दलीलें पेश कीं.
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध लगाने से मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा खतरे में पड़ जाएगी और उन्हें कक्षाओं में जाने से रोका जायेगा. वहीं कर्नाटक सरकार की दलील थी कि शिक्षा सभी का अधिकार है इसके लिए नियम भी एक ही होना चाहिए.