ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाएं ही पुरुषों से प्रताड़ित होती हैं पुरुष भी महिलाओं से प्रताड़ित होते हैं इस तरह के केस कम नहीं है जहां महिलाओं ने अपने हकों का दुरुपयोग किया है| 

मेंस डे के अवसर पर एक ऐसा डेटा भी सामने निकल कर आया है, जो वाकई में लोगों को चौंकाने वाला है। दरअसल मध्यप्रदेश में ऐसे कई पुरुष हैं, जो अपनी पत्नियों सहित महिलाओं से प्रताड़ित है। देखिए ये रिपोर्ट।

मध्य प्रदेश में ऐसे कई पुरुष हैं, जो अपनी पत्नियों सहित महिलाओं से प्रताड़ित है। और इनकी संख्या सैकड़ों में नहीं हजारों में है। पूरे प्रदेश में 18 हजार और अकेले भोपाल में ही 8 हजार से ज्यादा पुरुष अपनी पत्नियों से प्रताड़ित हैं। 

कई पुरुष तो ऐसे हैं जो खुदकुशी करना चाह रहे थे, लेकिन काउंसलर की मदद से ऐसे कदम को नहीं उठा पाए। भाई वेलफेयर सोसाइटी के पास कोविड-19 के समय से लेकर अब तक 22 महीनों में सिर्फ भोपाल से ही 8864 महिला प्रताड़ित पुरुषों के काउंसलिंग के कॉल आ चुके हैं, जिसमें 32 पुरुष तो ऐसे थे जो आत्महत्या करना चाह रहे थे। 

वेलफेयर सोसाइटी का कहना है की कई बार महिलाएं महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों का गलत उपयोग करती हैं जिसके चलते पुरुषों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

मेंस डे पर महिला प्रताड़ना पुरुषों का दर्द आया सामने। 

- मध्य प्रदेश में 18 हजार से ज्यादा पुरुष से प्रताड़ित। 

- सिर्फ भोपाल में ही 8864 पुरुषों ने मांगी मदद। 

- 32 पुरुष आत्महत्या करने से बचें। 

- कई पुरुष हुए हैं झूठे प्रकरणों का शिकार। 

- महिलाओं के प्रति झुकाव के चलते प्रताड़ित है समाज के कई पुरुष। 

- हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर बता रहे हैं अपनी समस्या। 

महिलाओं के द्वारा लगाए जाने वाली f.i.r. झूठे आरोप, और गुजारा भत्ता मांगने के लिए की जा रही प्रताड़ना पर एक युवक ने तो गुजारा भत्ता नाम से एल्बम तक ही बना डाला। क्योंकि इन सारी परेशानियों को उसने झेला था। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही महिलाओं की योजनाओं पर भी अपने आप को बोलने से रोक ना पाए, हनी चौरसिया ने यह कह दिया कि आखिर क्या वजह है कि प्रदेश में भांजीयो के ऊपर ही ध्यान दिया जाता है भांजो पर नहीं। 

इनके अलावा कई ऐसे पुरुष हैं, जो अपनी पत्नियों के द्वारा लगाए गए आरोपों से पीड़ित हैं। इतना ही नहीं कई पुरुषों का तो परिवार तक तबाह हो चुका है, ऐसा ही कुछ पत्नी प्रताड़ित पुरुषों ने अपना दर्द बयां किया। 

आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में करीब 35 से 40% महिलाएं आत्महत्या करती हैं, जिसके कई कारण होते हैं। वही अगर पुरुषों को देख जाए तो आत्महत्या करने वाले पुरुषों की संख्या 80 से 95% है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रताड़ित पुरुष कहीं ना कहीं महिलाओं से पीड़ित होते हैं। ऐसे में लगातार मांग उठ रही है, पुरुष आयोग के गठन की। जिसके बारे में ना तो कहीं चर्चा चल रही है, और ना ही कोई इसे बनाकर अपने वोट बैंक को खत्म करना चाहता है।