भोपाल। राज्य सरकार ने मंडला नगर के राज राजेश्वरी वार्ड में गोलाकार रुप से जा रही नर्मदा एवं बंजर नदी के संगम पर स्थित कलंका बुर्ज को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया है। इसके लिये केंद्रीय राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते एवं भाजपा की राज्यसभा सदस्य सम्पतिया उईके ने राज्य सरकार को पत्र लिखे थे।
राज्य संरक्षित स्मारक घोषित होने से अब इस स्मारक के आसपास बाउण्ड्री वाल बनाई जायेगी तथा अंदर एक उद्यान विकसित किया जायेगा। सत्रहवीं शताब्दि में बना यह स्मारक 1634 वर्गफीट में है तथा जीर्णशीर्ण अवस्था में है। उक्त स्मारक के पास गौंड राजा नरेंद्र शाह बुर्ज स्मारक भी है जो केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। जबलपुर के सेठ गोविन्द दास ने वर्ष 1930 में इस स्मारक के पास मंदिर भी बनाया था।
कलंका बुर्ज के बारे में किवदंती है कि यहां से एक गौंड राजा ने नदी में कूदकर आत्महत्या की थी। यहां आसपास बस्ती भी बनी हुई है। इस बुर्ज के पास चन्द्राकार में नदी जा रही है। यहां बड़ा ही मनोहारी दृश्य रहता है। केंद्रीय राज्य मंत्री कुलस्ते एवं सांसद उईके ने जब इस स्मारक के रखरखाव के लिये राज्य सरकार को पत्र लिखा तो राज्य के पुरातत्व विभाग ने भोपाल से एक टीम मंडला भेजकर इसका मुआयना कराया था। तब समस्या उत्पन्न हुई थी कि इस स्मारक को बिना राज्य संरक्षित घोषित किये इसका रखरखाव नहीं किया जा सकता है।
इसीलिये अब राज्य सरकार ने इसे मप्र प्राचीन स्मारक, पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष अधिनियम 1964 के तहत इसे राज्य संरक्षित घोषित कर दिया है। इससे इस स्मारक के सौ मीटर व्यास में कोई भी निर्माण एवं खनन प्रतिबंधित रहेगा तथा इस सौ मीटर के बाहर दो सौ मीटर में निर्माण एवं खनन बिना पूर्वानुमति के नहीं हो सकेगा। साथ ही इस स्मारक को अब कोई क्षति भी नहीं पहुंचा पायेगा।