टी 20 वर्ल्डकप 2021 में टीम इंडिया का शर्मनाक प्रदर्शन जारी है। पाकिस्तान के बाद अब विराट सेना को न्यूजीलैंड के खिलाफ भी एकतरफा हार झेलनी पड़ी। टीम इंडिया एक बार फिर दवाब वाले, करो या मरो के मैच में बिखर गई जिसकी वजह  से उसे मुंह की खानी पड़ी। 

लगातार दो मैचों में मिली करारी हार के बाद अब टीम इंडिया का सेमीफाइनल में पहुंचना अगर मगर के गणित के भरोसे रह गया है। क्रिकेट के खेल में कहा जाता है कि सफलता के लिए भाग्य और काबिलियत साथ ही मैदान में उसका प्रदर्शन दोनों की बहुत अहमियत होती है। 

ऐसा ही कुछ नजारा अभी तक यूएई में खेले जा रहे 2021 टी 20 वर्ल्ड कप में देखने को मिला। दरअसल अगर हम सुपर-12 के अब तक हुए 16 मैचों पर नजर डालें तो फिर सबसे अहम बात जो निकल कर आती है वह है टॉस|

अब तक हुए मैचों में बांग्लादेश ही एकमात्र टीम रही है जिसने टॉस जीतने के बाद मैच गंवाया हो। टीम इंडिया के साथ भी पहले दो मैचों में भाग्य के सिक्के ने साथ नहीं दिया, वैसे कप्तान कोहली टॉस के मामले में ज्यादातर दुर्भाग्यपूर्ण ही रहते हैं। लेकिन बावजूद इसके उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने बिना कोई आईसीसी इवेंट जीते विश्व क्रिकेट में सफलता के झंडे भी गाड़े हैं। 

न्यूजीलैंड के विरुद्ध टॉस गंवाने के बाद कप्तान कोहली ने टीम इंडिया में कुछ बदलाव भी किए, लेकिन इससे मैच के रिजल्ट में कोई फर्क नहीं पड़ा। ईशान किशन को टीम में शामिल करने की वजह उन्होंने सूर्यकुमार यादव का अनफिट होना बताया, वहीं भुवनेश्वर कुमार की जगह शार्दुल को टीम में जगह दी। फिरकी की मददगार यूएई की पिचों पर कप्तान और टीम मैनेजमेंट की अंतिम एकादश को देखकर एक बार फिर ऐसा लगा कि रविचंद्रन अश्विन का चयन सिर्फ चयनकर्ताओं की पसंद थी। 

यह बात इसलिए भी कही जा सकती है कि इंग्लैंड के लंबे दौरे में भी अश्विन सिर्फ बेंच का हिस्सा रहे थे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया 3 फिरकी ओर 2 तेज गेंदबाजों को आजमा सकती है। इसकी खास वजह पाकिस्तान की तुलना में कीवी बल्लेबाज ज्यादा फिरकी में उलझ सकते थे लेकिन कप्तान का अड़ियल रवैया और उनकी सीमित सोच टीम इंडिया पर एक बार फिर भारी साबित हुई। उन्होंने जिस उलटफेर पर दांव खेला वह भी नाकाफी साबित हुआ जब उन्होंने ईशान किशन की वजह से रोहित शर्मा और खुद अपना बल्लेबाजी क्रम बदला। 

हालांकि इसकी वजह बांये हाथ के ट्रेंट बोल्ट से दोनों को कुछ ओवर तक बचाना रहा होगा। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया, क्योंकि दोनों ओपनर मात्र 5 ओवर के खेल में पवेलियन में पहुंच गये। वैसे सच तो यह है कि टीम इंडिया के बल्लेबाजों में कहीं भी वो जज्बा और विश्वास देखने को नहीं मिला जो पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम में होना चाहिए। ऐसा लग रहा था, कि टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने टॉस हारने के साथ ही अपना मनोबल भी गंवा दिया है। 

वाकई में टीम के बल्लेबाजों में वह लड़ाकूपन और आत्मविश्वास की कमी देखने को मिली, जिसके लिए यह टीम जानी जाती थी। आईपीएल के दिग्गजों से भरपूर पूरी टीम मात्र 110 रनों के स्कोर बना सकी। न्यूजीलैंड टीम ने इस आसान लक्ष्य को हासिल कर मैच अपनी झोली में डाल लिया। भले ही टीम इंडिया लगातार दो मैच बड़े अंतर से हारने के बाद सेमीफाइनल की रेस से लगभग बाहर हो गयी है लेकिन इन मैचों में मिली हार के बाद सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि यह दबाव टीम इंडिया पर टॉस का था या फिर बड़े मैच का....?