गुजरात के गिर में संदिग्ध संक्रमण के कारण चार शेर शावकों की मौत हो गई थी। आशंका जताई जा रही है कि इनमें बेबेसिया वायरस का संक्रमण हो सकता है। बेबेसिया वायरस 'टिक्स' (कीड़ों) के जरिए फैलता है और इससे संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक से पानी बहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

वन विभाग ने 17 वयस्क शेरों को आइसोलेट कर उनकी निगरानी और इलाज शुरू किया है। इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में हाईलेवल बैठक की। बैठक में मौजूद वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने बताया कि गिर गढ़ड़ा और बाबरिया क्षेत्र के दायरे में आने वाले सभी शेरों की गहन निगरानी की जा रही है। अन्य शेरों में बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं।

वन विभाग अमरेली और भावनगर जिलों के महसूली क्षेत्र में मौजूद शेरों पर भी लगातार नजर रख रहा है। विभाग की ओर से रोजाना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। गर्मी की शुरूआत में फैलने वाली मौसमी बीमारियों को देखते हुए गिर क्षेत्र के 350 से ज्यादा शेरों के लिए डी-टिकिंग (कीड़े हटाने) और दूसरे स्वास्थ्य संबंधी उपाय किए जा रहे हैं।

इस अभियान में जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी शामिल की गई है। वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार को बताया था कि दो शेर शावकों की मौत संदिग्ध बेबेसिया वायरस संक्रमण से हुई है, जबकि तीन अन्य शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष में हुई। हालांकि उन्होंने गिर में किसी बड़े महामारी या संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार किया है।

2018 में गुजरात में 11 शेरों की मौत

इससे पहले 2018 में गुजरात में एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी। तब मौतों की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और प्रोटोजोआ संक्रमण का मिश्रण माना गया था। 2025 गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है।