पूरे देश की प्राथर्नाएं और बचाव दल के 17 दिनों की अथक मेहनत मंगलवार शाम रंग ले आई। उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में 12 नवंबर से फंसे 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। पहला मजदूर शाम 7.50 बजे बाहर निकाला गया।

झारखंड निवासी विजय होरो को सबसे पहले निकाला गया। इसके बाद दूसरे मजदूर गणपति होरो को सुरंग से बाहर निकाला गया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। सुरक्षित निकाले गए सभी मज़दूरों को एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया।  

मज़दूरों के सुरक्षित बाहर आने के साथ ही चारों ओर खुशी का माहौल बन गया। मजदूरों को मलबा भेदकर ड्रिलिंग मशीन के जरिए सुरंग बनाकर निकाला गया। 800 एमएम के पाइप सुरंग में डाले गए। इन पाइपों के जरिए एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकाला गया और वो रेंगते हुए बाहर निकाले गए। जो मजदूर कमजोर हैं या किसी वजह से रेंगते हुए बाहर नहीं आ सके उनके लिए एक स्ट्रेचर बनाया गया था, जिसमें पहिए लगे हुए हैं। इन मजदूरों स्ट्रेचर पर लिटाकर रस्सी के जरिये बाहर खींचा गया।

प्रशासन की ओर से मजदूरों के सुरंग से बाहर आने के बाद सारी तैयारियां की गईं थी। यहां पर एंबुलेस और डॉक्टरों की टीम तैनात रही।  सुरंग से बाहर निकलते ही इन मजदूरों के प्राथमिक परीक्षण के लिए सुरंग के बाहर बनाए गए अस्थायी अस्पताल में ले जाया गया।  इसके साथ ही यहां एक हैलीकॉप्टर भी तैनात किया गया था ताकि किसी को अगर जरुरत हो तो उसे तत्काल बड़े अस्पताल ले जाया जा सके। 

शाम को एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि अब 58 मीटर तक ड्रिलिंग हो गई है। रातभर काम किया गया है, हमारी टीम बहुत ही मुश्किल काम कर रही है। 58 मीटर तक जाना ये अभूतपूर्व उपलब्धि है। अभी 2 मीटर और जाना है तब हम कह सकते हैं कि हम आर पार हो गए हैं। सभी सुरक्षा एहतियात बरते गए हैं। किसी भी बात की जल्दबाज़ी नहीं की जा रही है।