गणेश उत्सव का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चारों ओर उत्साह दिखाई दे रहा है। इस बार प्राचीन गणेश मंदिरों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दमोह जिले के तेंदूखेड़ा विकासखंड अंतर्गत आने वाले तेजगढ़ ग्राम में स्थापित गणेश प्रतिमा के दर्शन को भी भक्तों की कतार लग रही है। यहं स्थापित प्रतिमा बेहद दुर्लभ है। भगवान की कई भुजाएं हैं और इस प्रकार की मूर्ति शायद कहीं और देखने नहीं मिल सकती है आज तक इस प्रतिमा के बारे में कोई पता नहीं लगा पाया है इतनी प्राचीन प्रतिमा यां कैसे आई इस इस स्थान के बारे में गांव के वृद्धों की अलग अलग राय है-
अष्टभुजा रूप में विराजमान हैं भगवान गणेश
तेंदूखेड़ा मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर तेजगढ़ गांव में भगवान गणेश की अति प्राचीन प्रतिमा मंदिर में स्थापित है यहां भगवान अष्टभुजा के रूप में विराजमान हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर रहे हैं आज तक इस प्रतिमा के बारे में कोई पता नहीं लगाया कि आखिर यह प्रतिमा यहां पर कैसे आई गांव के बुजुर्गों की अपनी अलग अलग राय है वृद्ध कहते है उनके पूर्वजों ने उन्हें बताया कि यहां भगवान गणेश की अष्टभुजा प्रतिमा 500 वर्ष पूर्व जमीन के नीचे से प्रकट हुई थी जिसे तेजगढ़ के राजा तेजी सिंह ने गणेश घाट के समीप स्थापित कराया था उसी समय से उस घाट का नाम भी गणेश घाट पड़ गया इसके साथ तेजगढ़ गांव को भी राजा तेजी सिंह ने ही बसाया था।
500 वर्ष प्राचीन है प्रतिमा
तेजगढ़ में विराजमान अष्टभुजा प्रतिमा के बारे में तेजगढ़ नगर के बढ़ यादव डॉ अनूप ठाकुर महेंद्र दीक्षित आदि ने बताया कि यह मंदिर ऐतिहासिक है और प्रतिमा काफी प्राचीन है जिसकी जानकारी उन्हें भी बुजुर्गों से मिली है तेजगढ़ के लोगो ने बताया कि 500 साल पहले ओरछा के हरदौल का जन्म हुआ था और उसी समय राजा तेजी सिंह का भी जन्म हुआ और उन्हीं के राज में यह प्रतिमा स्थापित है तेजगढ़ में 70 वर्ष से । ग्रामीण क्षेत्रों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित होने लगी है नहीं तो तेजगढ़ सहित आसपास के 50 गांव में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं होती थी भगवान गणेश के मंदिर के पास ही एक प्रतिमा स्थापित की जाती है जो रस्म आज भी चली आ रही है आज भले ही क्षेत्र में कई स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं की स्थापना होने लगी है लेकिन तेजगढ़ मंदिर में पूजा आज भी उसी पुराने रीति रिवाज के अनुसार होती है जनवरी माह में तिलया गणेश के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा होती है। वृद्ध बताते हैं कि तेजगढ़ में जो अष्टभुजा के रूप में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है वैसी प्रतिमा दूसरी कहीं और देखने नहीं मिलेगी इसका प्रमाण यह है कि गूगल पर जब भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा खोजते हैं तो तेजगढ़ में स्थापित ही आता है।