भोपाल: प्रदेश के वनों को आग से बचाने का अभियान सभी वन वृत्तों में प्रारंभ किया जायेगा। इसके लिये राज्य सरकार ने करीब 25 करोड़ रुपयों का बजट प्रदान किया है जिसमें कैम्पा से 15 करोड़ रुपये, केंद्र से 3 करोड़ रुपये एवं शेष विभागीय बजट से दिया गया है।
इस अभियान में अग्नि रेखाओं को साफ किया जायेगा। अग्नि रेखा वह होती है जिसमें वृक्षों के पत्ते, घांसफूस एवं छोटी-मोटी झाडिय़ां रहती हैं जिन्हें हटाया जाता है तथा उनके ढेर बनाये जाते हैं। चूंकि शीतकाल रहने से इन ढेरों में नमी रहती है, इसलिये इन्हें फरवरी माह में जलाया जाता है। ये अग्नि रेखायें ही आग लगने एवं उसके तेजी से फैलने का कारण बनती हैं। यह काम आउटसोर्स से भी कराया जाता है जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को पारिश्रमिक का भुगतान कर अग्नि रेखाओं को साफ करने में लगाया जाता है।
आधुनिक संसाधन नहीं हैं :
वनों में आग रोकने के लिये वन विभाग के पास आधुनिक साजो-सामान नहीं है। वे धातु के एक डण्डे में फ्लेप लगाकर आग को उससे दबाते हैं जिससे वह बुझ जाये। इसी प्रकार, वे ब्लोअर भी रखते हैं जो तेज हवा से सूखी पत्तियों को अग्नि रेखा से हटाता है। अग्निशमन यंत्र या फायर ब्रिगेड की कोई सुविधा नहीं रहती है और न ही विदेशों की तरह हेलीकाप्टर से पानी छिडक़ने की सुविधा मिलती है।
फायर अलर्ट सिस्टम भी बना हुआ है :
केंद्र सरकार ने सेटेलाईट के सहयोग से फारेस्ट फायर अलर्ट मेसेजिंग सिस्टम भी बनाया हुआ है। सेटेलाईट जिस वन क्षेत्र में अधिक तापमान पाता है, उसके बारे में इस सिस्टम के माध्यम से संबंधित राज्य के वन अमले को मेसेज भेजने लगता है। लेकिन यह सिस्टम 12 घण्टे में एक बार मेसेज देता है। प्रदेश में हर साल वनों में करीब पन्द्रह हजार घटनायें आग लगने की आती हैं जिनमें ज्यादातर संबंधित वन क्षेत्र के अमले को अपने साधनों एवं सर्विलांस से मिलती हैं।
प्रदेश में एहतियात बरतने से पिछले कई सालों से वनों में आग लगने की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, लेकिन छोटी-मोटी घटनायें जरुर होती रहती हैं जिनका कारण लोगों द्वारा जलती हुई धूम्रपान दण्डिका फैंकने या चूल्हे में खाना बनाते वक्त उसे जलता हुआ छोड़ जाना या वनों के पास स्थित खेतों में नरवाई जलाना रहता है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि वनों में आग की रोकथाम के लिये अभियान वलाया जायेगा तथा इसके लिये करीब 25 करोड़ रुपयों का बजट मिला है। उपलब्ध संसाधनों से ही रोकथाम का काम किया जाता है। फरवरी तक यह काम निपटाया जायेगा क्योंकि ग्रीष्मकाल में आग की घटनायें ज्यादा होने की स्थिति रहती है।