ग्लूकोमा: लक्षण, उपचार और रोकथाम - All About Vision..

ग्लूकोमा - लक्षण और कारण

ग्लूकोमा विकसित होने के पहले लक्षण क्या है?

ग्लूकोमा के चेतावनी संकेत क्या हैं?

क्या ग्लूकोमा को रोका जा सकता है?

ग्लूकोमा का सबसे आम कारण क्या है?

ग्लूकोमा क्या है? लक्षण, कारण, निदान, उपचार

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ग्लूकोमा की शुरुआती पहचान मशीनों द्वारा जांचों से

टोनोमीटर द्वारा: 

1. नेत्र दबाव की माप:

2.ऑप्टिक डिस्क नेत्र विम्य परीक्षण:

दृष्टि के बाहरी क्षेत्र की जांच के लिए विजुअल फील्ड्स

क्यों होता है ग्लूकोमा:

आंख का वह तरल पदार्थ जिसे एक्यूअस ह्यूमर के नाम से जाना जाता है, आंखों का स्वास्थ्य और आकार बनाए रखने के लिए इसका प्रवाह आवश्यक होता है। आंखों में इस तरल पदार्थ का बनना व सूखना आंखों की स्वस्थता का प्रमाण है। लेकिन अगर इस तरल पदार्थ के उत्पादन में वृद्धि होती है या तरल पदार्थ की निकासी में कमी होती है, तो इस असंतुलन के कारण आंख की नसों पर दबाव बढ़ने लगता है जिससे रोशनी ग्रहण करने वाली नस के लिए खून की सप्लाई कम हो जाती है और ऐसे में यह नस नष्ट हो सकती है।

क्या है ग्लूकोमा के लक्षण: 

● थियेटर जैसी अंधकारमय जगह पर देखने में असहजता। 

● आंखों के नंबर में जल्दी-जल्दी बदलाव। 

● आंखों की बाहरी दृष्टि का कम होना, सिरदर्द, आंखों में कुछ भाग से दिखाई न देना। 

● प्रकाश के आसपास इंद्रधनुषी छवि दिखना। 

● आंखों में तेज दर्द, चेहरे पर भी दर्द।  

● जी मचलना। 

● दृष्टि पटल पर अंधेरे क्षेत्रों का एहसास। 

● आंखों और चेहरे का तेज दर्द, आंखों की लाली। 

● प्रकाश के चारों तरफ चमक के साथ धुंधली दृष्टि। 

● मितली और उल्टी। 

ग्लूकोमा का समय पर उपचार दृष्टि को और अधिक बिगड़ने या अंधेपन से बचा सकता है।

ग्लूकोमा का उपचार है आवश्यक:

उपचार के अंतर्गत लेजर द्वारा चिकित्सा प्रबंधन, शल्य चिकित्सा प्रबंधन या प्रबंधन किए जाते हैं। दवाओं में आई ड्रॉप यानी बूंद की दवा अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

ग्लूकोमा के खुले कोण में तरल पदार्थ के उत्पादन में या तो स्थायी वृद्धि होती है या तरल पदार्थ की निकासी में कमी होती है। इस असंतुलन के कारण आंख पर पड़ते दबाव में इतनी वृद्धि होती है कि रोशनी ग्रहण करने वाली नस के लिए खून की सप्लाई कम हो जाती है जिससे यह नस नष्ट हो जाती है और व्यक्ति को दिखाई देने में कमी होने से दृष्टि दोष व अंधेपन की प्रमुख समस्या उत्पन्न हो जाती है। 

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें जीवन भर देखभाल और स्थायी उपचार कराने की जरूरत होती है। जैसे कि यहां आंख के दबाव को नियंत्रण में रखने के लिए कोई स्थायी उपचार या देखभाल नहीं है चाहे वह उपचार लेजर द्वारा किया गया हो या दवाइयों का सेवन करके या रोजाना डॉक्टरी जांच द्वारा करवाया गया हो।

अंधेपन की ओर धकेलता है:

ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहते हैं। इसे सुनकर ऐसा लगता है जैसे कि हमारे शरीर के मोती यानी आंखों से संबंधित है। जी हां, काला मोतिया आंखों का एक ऐसा रोग है जो कि धीरे-धीरे मरीज की आंखों में प्रवेश कर उसे अंधेपन की ओर धकेलता चला जाता है। मरीज को इसका आभास मात्र भी नहीं होता कि उसकी आंखें एक बहुत बड़े हादसे का शिकार बनने जा रही हैं। शायद इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर अर्थात खामोश हत्यारे का भी नाम दिया गया है।

खामोशी से नजर घटाता है:

इस समस्या की सबसे बड़ी व्यथा यह है कि यह खामोशी के साथ नजर को घटाता जाता है। प्रारंभिक अवस्था में न तो कोई लक्षण प्रकट होते हैं और न ही कोई संकेत। ऐसे ही चुपचाप एक दिन मरीज देखने लायक नहीं रहता। ग्लूकोमा से आंखों की रोशनी चले जाने के बाद उसे पुनः प्राप्त कर पाना अभी तक संभव नहीं हो पाया है।

ग्लूकोमा को साइलेंट किलर के तौर पर भी जाना जाता है। यह अंधेपन का सबसे बड़ा और मुख्य कारण है। इसके कभी भी किसी प्रकार के लक्षण सामान्यतः नजर नहीं आते, विशेषकर प्रथम | अवस्था में क्योंकि इसमें अपरिवर्तनीय रूप से दृष्टि के नष्ट होने के प्रमुख कारण या चिन्ह प्रदर्शित नहीं होते। आंख का स्वास्थ्य और आकार, तरल पदार्थ यानी एक्यूअस ह्यूमर के उत्पादन और निकासी पर निर्भर करता है।

Glaucoma - Symptoms and causes

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