भोपाल. अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एलएस रावत का प्रकरण सबक है. मंत्री के दबाव में प्रभारी मंत्री के अनुमोदन लिए बिना स्थानांतरण करने की सजा सेवानिवृत्ति के 4 महीने पहले मिल गया. संघ लोक सेवा आयोग ने नियम विरुद्ध स्थानांतरण के लिए दोषी मानते हुए रावत को एक पे स्केल नीचे वेतन भुगतान की सिफारिश की है. इस सिफारिश पर राज्य शासन ने आदेश भी जारी कर दिया है. दिलचस्प पहलू यह है कि रावत ने जिस मंत्री के दबाव में तबादला किया और जब बचाने की बारी आई तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए.
 

मामला पुराना है. यूपीएससी की सिफारिश पर राज्य शासन ने आदेश हाल ही में जारी किया है. तब 1984 बैच के आईएफएस छतरपुर के मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदस्थ थे और वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार थे. तत्कालीन वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार के दबाव में तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एवं वर्तमान में एपीसीसीएफ एलएस रावत ( समन्वय ) ने 2 दर्जन से अधिक तबादले प्रभारी मंत्री की सिफारिश लिए बिना ही कर दिए. तबादले के बाद तत्कालीन प्रभारी मंत्री ललिता यादव ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की. इसके अलावा नियम विरुद्ध किए गए तबादले की शिकायत लोकायुक्त संगठन तक भी पहुंच गई. मामला तूल पकड़ने लगा. लोकायुक्त ने जांच प्रारंभ कर दी. चूंकि आईएफएस बिरादरी में एलएस रावत को 'जेंटलमैन' अफसर कहा जाता है, इसलिए विभाग की ओर से माफीनामा का प्रस्ताव बनाकर तत्कालीन मंत्री डॉ शेजवार के पास भेजा. 

 

डॉ शेजवार ने विभाग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. यानी रावत को बचाने से साफ मना कर दिया. लोकायुक्त ने उन्हें कसूरवार माना. काफी दिनों तक रावत का मामला वन मंत्रालय में दबा रहा और जब अजय यादव सचिव फॉरेस्ट बने तो उन्होंने फाइल यूपीएससी को भेज दी. यूपीएससी ने काफी मंथन करने के बाद एक पे स्केल नीचे पर वेतन भुगतान की सिफारिश करके उसे  राज्य  शासन को भेज दिया. राज्य शासन ने सेवानिवृत्ति के 4 महीने पहले रावत को दंडित करने का फरमान जारी कर दिया.
 

*ऐसे अफसर अकेले नहीं है रावत*
 जंगल महकमे में मंत्री के दबाव में तबादले करने वाले एलएस रावत अकेले अफसर नहीं है. विभाग में अपवाद के रूप में एक दो अफसरों को छोड़ दिया जाए तो  सभी मुख्य वन संरक्षक रावत की तरह ही तबादले करते आ रहे हैं. उनके खिलाफ कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई. पिछले वर्ष ऐसा ही मामला बैतूल जिले से प्रकाश में आया था, जिसे विभाग के आला अफसरों ने तबादला आदेश निरस्त कर उन्हें अभयदान दे दिया है. इसकी भी शिकायतें लोकायुक्त को की गई है.
 

 *वेतन से लेकर पेंशन तक का होगा नुकसान*
 यूपीएससी की सिफारिश पर राज्य शासन द्वारा जारी किए गए आदेश के बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एलएस रावत को हर महीने वेतन में लगभग ₹50000 का नुकसान होने का अनुमान है. इसके अलावा उनके तह-जीवन पेंशन राशि में भी भारी नुकसान होने की संभावना है.
 

 इनका कहना है
' यूपीएससी के सिफारिश पर राज शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं. यूपीएससी ने सिफारिश की है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एलएस रावत को एक पे-स्केल नीचे का वेतन मान दिया जाए.'
 राकेश कुमार यादव
 अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-एक )