Sex Power Badhane Ke Upay..
पुरुषों में कई कारणों से वीर्य की हानि या वीर्य की कमी हो जाती है, जिससे शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, देर से वीर्य निकलना, नपुंसकता, इंद्रिय उत्थान की कमी या सहज भाव से मैथुन न हो पाना आदि अनेक समस्याएं हो जाती हैं।
जब पुरुषों में सेक्स समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो वे परेशान हो जाते हैं, निराश रहने लगते हैं या हिम्मत हार बैठते हैं। वे किसी भी उपाय से अपनी समस्या का हल ढूंढने के लिए भटकने लगते हैं। जबकि कभी-कभी आयुर्वेद के सस्ते, सरल योगों से काफी लाभ मिल जाता है। यहां कुछ ऐसी औषधियां प्रस्तुत हैं, जिन्हें साधारण आय वाले व्यक्ति भी प्रयोग कर सकते हैं।
सेक्स-सुख सुखी जीवन का आधार है। विवाहित जीवन में संपूर्ण सुख तभी मिल पाता है, जब पति-पत्नी शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ हों। यदि स्त्री या पुरुष को कोई यौन-व्याधि है, तो उचित उपायों से उसे शीघ्र दूर किया जाना चाहिए। बहुत से पुरुष यौन-दुर्बलता के कारण हीनता से ग्रस्त हो जाते हैं और पत्नी के समक्ष लज्जित होते रहते हैं। जबकि वे उपचार-लाभ द्वारा अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।
निम्न औषधियों में से कोई एक औषधि चुनकर नियमित रूप से परहेज के साथ बताई गई विधि अनुसार लेते रहने से निश्चित ही सेक्सगत अनेक परेशानियों से बचा जा सकता है। इन प्रयोगों से पुरुष का बल-पराक्रम बढ़ता है। पुरुषत्व के लिए इन प्रयोगों को अपनाया जा सकता है
• सफेद प्याज के दो छोटे चम्मच रस में एक चम्मच (टीस्पून) शहद तथा आधा चम्मच शुद्ध घी मिलाकर रोज सुबह एक बार लेते रहने से नपुंसक भी सुखमय दांपत्य जीवन बिताने लगता है। इस प्रयोग के साथ ही रात को सोने से पहले मीठे गर्म दूध के साथ शतावरी का चूर्ण एक छोटी चम्मच लेते रहने से कामेच्छा जागृत होती है, वीर्य की बढ़ोतरी भी होती है।
• तालमखाना तथा कौंच बीज का महीन चूर्ण बनाकर उसमें बराबर मात्रा में शक्कर मिलाकर 5 से 10 ग्राम खुराक दूध के साथ नित्य रात को लेते रहने से शरीर को शक्ति प्राप्त होकर शीघ्र स्खलन में लाभ होता है।
• सूखे सिंघाड़े तथा अश्वगंधा का चूर्ण समभाग शक्कर में मिलाकर रख लें। इसमें से 5 या 10 ग्राम चूर्ण 200 मि. लीटर दूध में मिलाकर सुबह-शाम पीने से पुरुषत्व एवं वीर्य की वृद्धि होती है।
• मोचरस का 5 ग्राम चूर्ण लेकर 10 ग्राम शक्कर मिलाकर दूध के साथ तीन माह तक सेवन करने से बल-वीर्य की वृद्धि होती है तथा स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।
• उड़द की छिलके रहित 50 ग्राम दाल रात को पानी में भिगो दें। सुबह दाल को पीसकर कड़ाही में घी डालकर अच्छी तरह सेंक लें। जब दाल लाल हो जाए, तो उबलते हुए दूध में डालकर खीर बनाकर रोज सुबह खाएं। खुराक अपने हाजमा के अनुसार ही लें। लगभग चालीस दिनों में ही शरीर पुष्ट एवं बल-वीर्ययुक्त हो जाता है I
• सफेद तिल एवं गोक्षुर का चूर्ण 5-5 ग्राम लेकर बकरी के दूध में डालकर उबालें। ठंडा होने में पर दूध में एक चम्मच शहद डालकर पीते रहने से हस्तमैथुन जनित नपुंसकता दूर होती है एवं काम-शक्ति बढ़ती है।
• विदारीकंद का 5 ग्राम महीन चूर्ण घी शक्कर के साथ मिलाकर चाट लें और ऊपर से एक गिलास मीठा दूध पी लें। यह प्रयोग 6 से 12 माह तक करने पर वृद्धों को भी युवाओं जैसा अहसास हो सकता है।
• शतावरी का 5 से 10 ग्राम चूर्ण 200 मि. लीटर दूध में पकाकर चौथाई शेष रहने पर उसमें शक्कर मिलाकर पीते रहने से इंद्रियों में ताकत आती है और पुरुषत्व बढ़ता है।
• मुलेठी, विदारीकंद, तज (दालचीनी), लौंग, गोक्षुर, गिलोय सत्व एवं सफेद मूसली बराबर-बराबर मात्रा में लेकर सबका महीन चूर्ण बनाकर रख लें। रोज 5 ग्राम चूर्ण 200 मि. लीटर दूध के साथ सेवन करने से बल-वीर्य बढ़ता है।
• विदारीकंद, मुलेठी, सफेद मूसली, काली मूसली, गिलोय, त्रिफला, नागकेसर तथा शतावरी को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से रोज 5 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद एवं आधा चम्मच घी मिलाकर चाट लें। इसके बाद ऊपर से दूध पी लें। तीन माह के लगातार प्रयोग से यौन-शक्ति में बहुत लाभ होता है।
• विदारीकंद, गोखरू, तालमखाना, शतावरी, बहमन सफेद व लाल, सफेद एवं काली मूसली तथा सालम मिश्री 20-20 ग्राम, कुलिंजन, सोंठ, छोटी पीपल, दालचीनी, जावित्री तथा जायफल 10-10 ग्राम को कूट-पीसकर, कपड़े से छानकर महीन चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण मीठे दूध के साथ सुबह-शाम पीते रहने से वीर्य की कमी, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, धातु दुर्बलता, कामोत्तेजना की कमी और शिश्न की नसों की कमजोरी आदि अनेक व्याधियां दूर होती हैं।
विशेष- औषधियों की मात्रा शारीरिक बल एवं रोगों के आधार पर तय की जाती है।
नोट: उक्त जानकारियां आयुर्वेदिक पत्र-पत्रिकाओं, इंटरनेट और आयुर्वेदाचार्य के बताए अनुसार हैं, कृपया कोई भी प्रयोग किसी उचित चिकित्सक की देखरेख में ही प्रारंभ करें, News Puran इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता.