सिया कमेटी की कार्यशैली से नाराज है पर्यावरण मंत्री
 भोपाल. पर्यावरण मंत्री हरदीप सिंह डंग ने सिया कमेटी ( एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी ) की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है. पर्यावरण मंत्री डंग की नाराजगी की वजह भी साफ है. सिया कमेटी एनवायरमेंट क्लीयरेंस देने के बाद माइनिंग, इंडस्ट्री और रियल स्टेट के कारोबारियों का शर्तों के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा नहीं करती है. जबकि नियम स्पष्ट है कि हर 6 महीने में शर्तों का पालन प्रतिवेदन सिया कमेटी को कारोबारियों से लेना चाहिए. पर्यावरण मंत्री ने निर्देश भी दिए हैं कि सिया कमेटी सभी कारोबारियों को वेबसाइट बनाने के लिए दबाव बनाए. पर्यावरण मंत्री ने कहा कि वे  हर 2 महीने में कमेटी के कार्यों की समीक्षा करेंगे.
 
पिछले दिनों पर्यावरण मंत्री हरदीप सिंह डंग ने सिया कमेटी और सियेक ( स्टेट एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी ) के कार्यों की समीक्षा की. बैठक की शुरुआत में ही सिया कमेटी में लंबित प्रकरणों के क्लीयरेंस में हो रही देरी की वजह जानी. इस पर सिया कमेटी ने अपना ठीकरा  सियेक कमेटी पर फोड़ी. मंत्री की उपस्थिति में सियेक कमेटी ने किया कमेटी की पोल खोलते हुए कहा कि सिया कमेटी ने प्रस्ताव का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है. इसकी वजह से उनकी वेबसाइट पर लंबित प्रस्ताव "निल' हमेशा बना रहता है. जबकि सिया कमेटी के अधिकारियों द्वारा इंडस्ट्री के प्रस्ताव में व्यवहारिक शर्तें लगाकर उन्हें वापस कर दिया जा रहा है. मसलन, इंडस्ट्री के प्रस्ताव पर सिया सरते लगा देती है कि आपकी इंडस्ट्री में कितना कार्बन निकलेगा और उसके प्रभाव को कम करने के लिए क्या क्या कदम उठाया जाएंगे. पर्यावरण मंत्री डंग को सिया की ये शर्तें व्यावहारिक लगी. सिया अध्यक्ष अरुण भट्ट को इस पर विचार करने के निर्देश दिए.

 *क्लीयरेंस मिलने के बाद नहीं होता शर्तों का पालन*

 इस बैठक में यह भी खुलासा हुआ कि सिया के अधिकारी  शर्तों  का क्रियान्वयन कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. यानी सियेक कमेटी ने जिन शब्दों के आधार पर  माइनिंग, इंडस्ट्री और रियल स्टेट कारोबारियों को एनवायरमेंट क्लीयरेंस दी है, उसके क्रियान्वयन की जवाबदेही सिया कमेटी के अधिकारियों की है. नियमानुसार सरसों के क्रियान्वयन की हर 6 महीने में समीक्षा होनी चाहिए, जो कि नहीं हो रही है. इस पर मंत्री ने नाराजगी जताई है. 10% से भी कम कारोबारी ही शर्तों का पालन कर रहे हैं. इन शर्तों मेरी एक साथ वेबसाइट बनाने की है. इसका पालन भी 1% कारोबारी ही कर रहे हैं. जबकि सरसों में वेबसाइट बनाना अनिवार्य है.

इनका कहना है
 मैंने बैठक ली है. अधिकारियों से कहा है कि हर 2 महीने में समीक्षा करूंगा. एनवायरमेंट क्लीयरेंस की शर्तों का पालन अनिवार्य रूप से कराएं.
 हरदीप सिंह डंग पर्यावरण मंत्री