भोपाल. वन विभाग का पूरा अमला 31 जनवरी में सेवानिवृत्त हो रहे के रमन को पीसीसीएफ बनाने पर अड़ गया है. यह बात अलग है कि अभी तक राज्य शासन से हरी झंडी नहीं मिल पाई है. बिग विभाग ने यह प्रस्ताव तब भेजा, जब कैडर रिव्यू के दौरान कार्मिक विभाग ने पीसीसीएफ के 3 पद बढ़ाए जाने के औचित्य पर सवाल उठाए है.

जंगल महकमे में अधिकारियों के बीच चर्चा का मुख्य बिंदु ग्रीन इंडिया मिशन के प्रमुख के रमन बने हुए है. चर्चा के बीच एक ही प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि 1988 बैच के आईएफएस रमन सेवानिवृत्त होने के पहले पीसीसीएफ बन सकेंगे अथवा नहीं..? यह प्रश्न इसलिए भी उठने लगा क्योंकि केडर रिव्यू 1988 बैच के के रमन, असीम श्रीवास्तव और चितरंजन त्यागी को पीसीसीएफ पद पर प्रमोट करने की मंशा से एपीसीसीएफ के पद कम कर पीसीसीएफ के 3 पद और बढ़ाने की मांग की गई थी. मध्य प्रदेश बैच के आईएएस अफसर और तत्कालीन सचिव कार्मिक दीपक खांडेकर ने सेवानिवृत्त के अंतिम मिनटों में राज्य के आईएफएस अफसरों को उपकृत करने की मंशा से 3 पद बढ़ाने यह प्रस्ताव पर सहमति दे दी थी. उनके सेवानिवृत्त के बाद वर्तमान कार्मिक सचिव ने यह टिप्पणी करते हुए आपत्ति लगा दी कि कैडर में स्वीकृत पद 180 के अंतर्गत 2% ही तीर्थ की बढ़ोतरी की जा सकती है. जबकि मध्यप्रदेश में इससे अधिक पीसीसीएफ पद पर अधिकारी पदस्थ है. ऐसी स्थिति में पीसीसीएफ के तीन और नए पद बढ़ाने का औचित्य समझ में नहीं आता है. इस आपत्ति के बाद 88 बैच के आईएफएस  अफसरों के पीसीसीएफ बनने के मंसूबे पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे है.

विभाग ने खोजा नया तरीका
'जहां चाह, वहां राह' के सिद्धांत वन विभाग ने के रमन को पीसीसीएफ पद पर प्रमोशन देने की ठान ली है. यही वजह रही कि 88 बैच के आईएफएस अफसरों के दबाव में वन मुख्यालय ने 3 महीने के लिए पीसीसीएफ का एक पद बढ़ाने संबंधित  प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है. हालांकि अब तक  वन विभाग के प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिल पाई है. विभाग के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि के रमन की विशेष उपलब्धि भी नहीं रही कि जिसके मद्देनजर रमन के प्रस्ताव को विशेष मानते हुए राज्य शासन सहमति दे दे. इसके पहले ऐसा ही एक प्रस्ताव पन्ना में बाघों की बसाहट करने की उपलब्धियां हासिल करने वाले अफसर श्रीनिवास मूर्ति को पीसीसीएफ पद पर प्रमोट करने का प्रस्ताव भेजा गया था जो निरस्त कर दिया गया.

रिटायरमेंट के बाद वन विभाग ने किया था प्रमोट
जंगल महकमे में न कोई नियम है और न कोई ऊसूल. यहां मैनेजमेंट फंडा लागू होता है. इसी फार्मूले के तहत प्रमोशन और पोस्टिंग होती आ रही है. इस विभाग में वाय सत्यम इकलौते ऐसे आईएफएस अफसर रहे, जिन्हें सेवानिवृत्ति के चंद मिनट बाद पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट किया गया. तब यह तर्क दिया गया था कि मुख्य वन संरक्षक शहडोल के पद पर रहते हुए वाय सत्यम ने दिन में एक करोड़ 47 लाख रोपकर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराया था. यही नहीं, सत्यम ने ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को प्रदेश में सात करोड़ पौधे रोकने के लिए गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराने का ब्लू प्रिंट तैयार किया था. इसके एवज में उन्हें दो बार सेवा वृद्धि भी दी गई. यह बात अलग है कि गिनीज बुक में नाम तो दर्ज नहीं हुआ बल्कि शिवराज सरकार को विपक्ष की आलोचनाओं का सामना आज तक करना पड़ रहा है.