भोपाल । मप्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल फोन खरीदने के लिये सीधे राशि देने का विकल्प केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा खारिज करने के बाद अब सरकार अपने वादे को पूरा करने के लिये हरसंभव रास्ता तलाश रही है, क्योंकि यह मामला करीब चार साल से अटका हुआ है।

मप्र की शिवराज सरकार अब कार्यकर्ताओं को मोबाइल खरीदकर ही देने की तैयारी में है। लेकिन खरीदी के नेटवर्क की शिकायतों का

अंदेशा भी उसे है। लिहाजा खरीददारी की प्रक्रिया बदल दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब केंद्रीयकृत व्यवस्था की बजाए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी जैम पोर्टल से निविदा जारी करेंगे और

फिर खरीदी होगी। इससे पहले भी निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी के चलते चार साल से विभाग मोबाइल नहीं खरीद पा रहा है। लिहाजा मंत्रालय से मोबाइल की बजाय राशि देने की अनुमति मांगी गई थी।

10 हजार का मोबाइल दिलाने के लिए राज्य सरकार को मिली राशि

मप्र में करीब 95 हजार आगनबाड़ी केंद्र है। जिनमें कार्यरत कार्यकर्ताओं को मोबाइल दिए जाने हैं, क्योंकिसरकार ने कुपोषण, एनीमिया, पोषण आहार सहित तमाम सुविधाओं की मानीटरिंग ऑनलाइन कर दी है। कार्यकर्ताओं की उपस्थिति भी मोबाइल के माध्यम से ही ली जा रही है। इसलिए केंद्र सरकार ने 10 हजार रुपये का मोबाइल फोन दिलाने के लिए राज्य सरकार को राशि दी है। पिछले चार साल में विभाग चार बार निविदा निकाल चुका है, पर हर बार खरीदारी की शर्तों को लेकर हंगामा खड़ा हुआ है। महिला एवं बाल विकास संचालनालय के कुछ अधिकारियों पर चंद कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अक्टूबर 2020 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मुख्य सचिव और विभाग के प्रमुख सचिव ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर कार्यकर्ताओं को मोबाइल खरीदने के लिए राशि देने की अनुमति मांगी थी। जानकार बताते हैं किऐसा करने के लिए नियमों में संशोधन करना पड़ता। इसलिए मंत्रालय ने राशि देने से इन्कार कर दिया। अब व्यवस्था विकेंद्रीकृत की जा रही है।