दीवाली के त्योहारा का आज आखिरी दिन है लेकिन पटाखों का घुआ अब लोगों का दम घोट रहा है। मप्र में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सलाह नहीं मानने वाले ग्वालियर में वायु प्रदूषण दिल्ली की तरह रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है। बीते 48 घंटे से ग्वालियर की हवा अति गंभीर रूप से खराब है। दीपावली पर जलाए गए पटाखों से निकले धुएं के कारण वायु प्रदूषण की स्थिति बनी है। उधर दिल्ली में आज भी सुबह कष्टप्रद रही तो बिहार में शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब ने 40 जानें ले ली।
मप्र में प्रदूषण का अंदाजा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पूर्व से था। यही वजह थी कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दीपावली के एक दिन पूर्व गाइडलाइन जारी कर दी थी। जिसमें सिंगरौली और ग्वालियर का नाम था। पीसीबी ने साफ कहा था कि इन शहरों में पटाखें बिल्कुल भी न जलाएं जाएं। पीसीबी ने गाइडलाइन में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों का हवाला भी दिया था। तब भी ग्वालियर के स्थानीय प्रशासन नहीं माना और दीपावली के
350 पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
दिन गुरुवार रात आठ बजे से रात 10 बजे तक पटाखें जलाने की अनुमति दे दी। नतीजा यह रहा कि दीपावली के दिन रात 12 बजे से दूसरे दिन शुक्रवार रात 10 के बीच ग्वालियर शहर के सिटी सेंटर और फूलबाग क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 तक था। प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सिंगरौली में भी वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया था।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा, इस बार घटा प्रदूषण
हालकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो आंकड़े जारी किए, उसमें पीएम 10-160 रहा और पीएम 25-95.64 दर्ज किया गया है। जबकि ध्यानि प्रदूषण 60 डेसिवल बताया गया है। यह आकड़े दीपावली की रात को हुई आतिशबाजी से मेल नहीं खाते नजर आ रहे हैं। क्योंकि दीपावली की रात को जमकर आतिशबाजी चली और चारों और बारूद के जलने की बू तथा धुंआ और तेज आवाज का शोर था। हालांकि बोर्ड का दवा है कि इस बार पिछले पांच साल से कम प्रदूषण हुआ और मानक के अनुसार बम पटाखे लोगों ने चलाए जो पटाखे दुकानों पर बिके, उनके सैपल प्रशासनिक अफसरों ने जांच के लिए भेजे थे, जो मानक के अनुसार पाए गए। इसके साथ ही इन दिनों कचरे के ढेर में लोग आग लगा देते थे, जो इस बार देखने को नहीं मिला। शहर में डीजल से चलने वाले टैपो व अन्य वाहनों में कमी आई डेंगू के कारण नगर निगम लगातार फोगिंग करा रहा है और पेड़ पौधों पर पानी का छिड़काव करा रहा है इससे भी प्रदूषण कम हुआ है। यही सब कारण रहे, जिससे प्रदूषण का स्तर पिछली बार से कम रहा है। तीन स्थानों पर लगाई थी मशीन प्रदूषण की जांच के लिए बोर्ड की ओर से शहर में तीन स्थानों पर मशीन लगाई गई थी।