भोपाल. वन विभाग के अफसरों की संवेद हीनता के चलते 10 वर्षीय भालू की वन विहार में दुखद अंत हो गया. वन विहार प्रबंधन ने उसके उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी परंतु खून का अत्यधिक बहाव के कारण उसे बचाया नहीं जा सका. मृत भालू 12 घंटे तक कटीले तार में फंसकर तड़पता रहा. बुधनी रेल से 6 किलोमीटर दूर तैनात सतपुड़ा रेस्क्यू टीम के सदस्यों का भालू के प्रति मन नहीं पसीजा. भालू भी शेड्यूल वन्य प्राणी है.



सीहोर वन मंडल की बुधनी रेंज के पांडाडोह बीट 1 जनवरी अलसुबह 4 बजे से तार फेंसिंग में फंस गया. स्वयं को तार से निकालने के लिए भरसक प्रयास किया. इससे उसके दांत टूट गए. तार से उसका शरीर लहूलुहान हो गया. गंभीर रूप से घायल होने की वजह से वह तड़पने लगा. गांव के चौकीदार को उसके तड़पने की आवाज सुनाई दी. चौकीदार भी सूर्य उदय होने का इंतजार करता रहा. इस बीच गंभीर रूप से लहूलुहान भालू तड़पता रहा.  उसने अपने रेंजर और एसडीओ को जानकारी दी.

बुधनी से 6 किलोमीटर दूर तैनात सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू टीम से रेंजर ने भालू के रेस्क्यू  करने की गुहार लगाई. रेस्क्यू टीम सतपुड़ा के प्रभारी डॉक्टर गुरुदत्त शर्मा है. रेस्क्यू टीम सतपुड़ा ने सीमा का जिक्र करते हुए मदद करने से इंकार कर दिया. जबकि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू टीम के अंतर्गत सीहोर वनमंडल क्षेत्र का बुधनी इलाका आता है.



रेस्क्यू टीम का इनकार घोर संवेदहीनता की श्रेणी में आता है. सतपुरा टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम के इनकार के बाद बुधनी से 69 किलोमीटर दूर वन विहार के अधिकारियों से संपर्क किया. भोपाल वन विहार की रेस्क्यू टीम करीब 1:30 बजे बुधनी के पांडाडोह पहुंची. 3 घंटे मशक्कत के बाद भालू को रेस्क्यू कर उसे भोपाल वन बिहार लाया गया. तब तक काफी देर हो चुकी थी. भालू के दांत और शरीर से अत्यधिक खून का रिसाव हो चुका था. अत्यधिक खून के रिसाव के चलते उपचार के दौरान भालू की दर्दनाक मौत हो गई.

 इनका कहना
 भालू के रेस्क्यू करने संबंधित सूचना हमें नहीं दी गई. दूरी दीक्षित का सवाल ही नहीं उठता कई बार हम रेस्क्यू करने मेलघाट और बुधनी भी गए हैं. यदि ऐसी बात है तो मैं इसकी जांच करवाता हूं. यह घोर संवेदहीनता की श्रेणी में आता है.
 *एल कृष्णमूर्ति*, संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व