Bhopal: अशोका गार्डन निवासी 31 साल के रंजीत कुमार झा का अनूठा शौक है। अपनी दादी से मिले बंगाल रियासत के पुराने बांट को देखकर उनको संग्रह का शौक लगा। 2013 से अब तक उन्होंने नवाबी दौर में चलित 500 से ज्यादा बांटों का संग्रह कर लिया है।
रंजीत के पास तौल के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग रियासतों के बांट मौजूद हैं, इसमें भोपाल रियासत के बांट भी शामिल हैं। सोलर प्लांट डिजाइन का काम करने वाले विद्युत अभियंता रंजीत बताते हैं कि रविवार को वे अक्सर भोपाल के कबाड़खाना में बांट खोजने जाते हैं।
कई कीमती बांट तो उन्हें कबाड़ में ही मिले जिसे उन्होंने मुंह मागी कीमत पर हासिल किया। कई बार तो वे रास्ते में कबाड़ के ठेले देखकर भी रुक जाते हैं कि कहीं उन्हें कीमती बांट मिल जाए। उनके पास बांटों का संग्रह इतना ज्यादा हो गया है कि उनकी सुरक्षा के लिए नियमित देखरेख करना पड़ती है। रंजीत के मुताबिक इसी संग्रह को लेकर उनका नाम तीन बार लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।
भोपाल रियासत के बांट से ही बना था भोपाल नगर निगम का लोगो|
एक साल पहले तक दो मछलियों वाला भोपाल नगर निगम का लोगो भोपाल रियासत के बांट से लिया गया था। रंजीत झा के कलेक्शन में यह बांट भी शामिल है। साल 2019 तक दो मछली वाला लोगो चला, जिसे बदलकर अब राजा भोज की प्रतिमा के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। इसी तरह मंदसौर रियासत के बांट भी रंजीत ने अपने पास संजोए रखे हैं। एक सेर, आधा सेर और पांच सेर के बांट भी|
हर सेर पर एक आकृति बनी है रंजीत के पास मौजूद बांटों में भोपाल के एक सेर (5 किलो) पर मछली का निशान तो ग्वालियर के सेर पर नाग एवं सूर्य तथा मेवाड़ के सेर पर सूर्य और तलवार की आकृति बनी हुई है। भोपाल स्टेट के सेर पर उर्दू में कुछ लाइनें लिखी हैं।
एक सेर, आधा पाव सेर, आधा छटाक पांच सेर तक वजन करने वाला बांट शामिल हैं। भोपाल रियासत के बांट पर मछली के निशान बने हुए हैं।
रंजीत के खजाने में शामिल हैं भोपाल, ग्वालियर और इंदौर रियासत के नायाब बांट 1905 में ग्वालियर रियासत और 1911 में इंदौर रियासत में चलने वाले बांटों के साथ ही भोपाल रियासत में 1924 के बांट भी इनके पास मौजूद हैं। इसके अलावा बंगाल सहित कई रियासतों के छोटे-बड़े बांट भी इनके संग्रह में हैं। कई बांटों पर उर्दू में कुछ लिखा है, जबकि कई बांट ऐसे हैं, जिनकी लिखावट समझना आसान नहीं है।