भोपाल- अफसरों के बोझ से परेशान वन महकमे को अब प्रधान मुख्य वनसंरक्षक यानी पीसीसीएफ के तीन नए पद अगले महीने तक मिल सकते हैं। इसके लिये वन विभाग के कॉडर रिव्यू के प्रस्ताव पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को इसी महीने फैसला करना है।

 

हालांकि वन महकमे में पहले से ही अफसरों की भरमार है और मैदानी स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी।

 

जानकार सूत्र बताते हैं कि वन विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी, ग्रीन इंडिया मिशन और मानव संसाधन शाखा के लिए पद मांगे हैं। पद मंजूर होने के बाद प्रदेश के आइएफएस कैडर में पीसीसीएफ के आठ पद हो जाएंगे। वहीं एक्स कॉडर में इतने ही अधिकारी पदोन्नत किए जा सकेंगे।

 

आइएफएस कॉडर की हर पांच साल में समीक्षा होती है। बताया जाता है कि वैसे तो मिड टर्म रिव्यू वर्ष 2018 में होना था, पर विधानसभा चुनाव के चलते पद बढ़ाने या कम करने का प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका। बताया जाता है कि इस बार जो प्रस्ताव बना है वह पीसीसीएफ के तीन पद वाला 1 में है। जनवरी 2021 वन मंत्रालय ने इन पदों की उपयोगिता पूछी थी। जिसका जवाब भेजा जा चुका है। नए पद मिलने पर तीन और अधिकारी पदोन्नत हो जाएंगे।

 

माना जा रहा है कि कॉडर रिव्यू का सीधा फायदा 1987 बैच के आइएफएस जसवीर सिंह चौहान को मिलेगा और वे अगले मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक बन सकते हैं। वे वर्तमान में वन मुख्यालय की उत्पादन शाखा में पदस्थ हैं। चौहान वन्य के जीवों के मामले में ज्यादा अनुभव रखने वाले अफसर कहे जाते हैं। प्रदेश के वर्तमान मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक आलोक कुमार 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। लिहाजा नए की चयन प्रक्रिया शुरू हो गई है।

 

वन महकमे में फिर शीर्ष पदों को बढ़ाने की राह पर सरकार, तीनों कॉडर में शीर्ष पदों का निर्बाध खेला।

 

मप्र में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कॉडर में शीर्ष पदों पर अफसरों की निगाहें रहती हैं, इसीलिये आईएएस कॉडर में अपर मुख्यसचिव और मुख्यसचिव स्तर के कई अफसर हैं। यही स्थिति आईपीएस कॉडर में भी है। पुलिस मुख्यालय में डीजीपी और एडीजी स्तर के अफसर को लिये कई शाखाओं काम देने के आईएफएस संवर्ग का सृजन करना पड़ा है। के बारे में भी अफसरों की यही दौड़ जारी रहती आयी है। कहा यही जाता है कि प्रशासनिक सेटअप का जो पिरामिड होना चाहिये, वह उल्टा हो गया है। यानि मैदानी स्तर पर अमला कम है और शीर्ष स्तर पर अफसरों की भीड़ है।