भोपाल: मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों को स्कूल भेजने का फरमान जारी कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक अब मध्य प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों को स्कूल आकर पढ़ना होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के इस फरमान के बाद सभी स्कूलों के पुल कैपेसिटी में लगने के रास्ते साफ हो गए हैं।
इस ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के स्कूली बच्चों के अभिभावक चिंतित हो गए हैं। अब उन्हें अपने बच्चों को स्कूल भेजना होगा। लेकिन अभिभावकों की चिंता यह है कि कहीं उनका बच्चा स्कूल में कोरोनावायरस का शिकार ना हो जाये।
सरकार इस बात से निश्चिंत है क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चों में कोविड-19 ज़्यादा असर नहीं कर रहा।
अभिभावकों की चिंता सरकार की निश्चिंतता से उलट है। उन्हें इस बात का डर है कि स्कूल में कोरोनावायरस से बच्चे का बचाव हो पाएगा या नहीं।
दूसरी बात यह है कि लंबे समय से बच्चे अपने घरों में ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं। पेरेंट्स की दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है। बच्चों को स्कूल भेजना अब इतना आसान नहीं है। सभी पेरेंट्स को बच्चों की यूनिफॉर्म से लेकर सभी चीजें खरीदनी है जो स्कूल में अनिवार्य है।
दूसरी बात यह है कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उचित साधन की जरूरत होगी। ज्यादातर वैन संचालकों ने वैन इधर-उधर इंगेज कर रखी है। कुछ वैन संचालक अपनी वैन बेचकर दूसरा काम धंधा कर रहे हैं।
ऐसे में अभिभावकों की चिंता यह है कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजें तो कैसे भेजें।
कई स्कूल वैन वाले बहुत ज्यादा शुल्क मांग रहे हैं ऐसे में अभिभावक दोहरी चिंता में पड़ गए हैं।
स्कूलों का खुलना भी जरूरी है, कोरोनाकाल ने छात्रों की लाइफ स्टाइल को बदल दिया है। उनका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। शारीरिक गतिविधि घट गई है। स्कूल खुलना जरूरी तो है ही साथ ही उन्हें स्कूल के लिए तैयार करना भी जरूरी है।