माध्यमिक शिक्षा मंडल ने भी 12 फरवरी से आयोजित होने वाली 10वीं-12वीं दोनों कक्षाओं की परीक्षाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। हालांकि बोर्ड के इस निर्णय से स्टूडेंट्स, टीचर और स्कूल संचालक सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। स्कूल संचालकों और अभिभावकों का कहना है कि इससे स्टूडेंट्स को पढ़ाई के लिए दो माह का समय कम मिल रहा है, ऐसे में परीक्षाओं का समय पूर्व वर्षों के अनुसार एक माह बढ़ाकर मार्च से से परीक्षाएं शुरू की जाएं।
पालक महासंघ मप्र के अध्यक्ष कमल विश्वकर्मा का कहना है कि पहले से ही बच्चे कोरोना संक्रमण के चलते प्रभावित हुए हैं। ऐसे में बीते वर्षों के मुकाबले एक माह पहले एग्जाम कराने से बच्चों की तैयारी और रिजल्ट प्रभावित होंगे। अधिकतर अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों की एग्जाम फरवरी माह की जगह मार्च अथवा अप्रेल माह में आयोजित की जाए। इससे बच्चों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल पाएगा।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन मप्र के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि स्कूलों को खोलने में स्कूल शिक्षा विभाग ने देरी की है। अभी भी बच्चे स्कूलों में नहीं पहुंच रहे हैं। स्कूलों में शिक्षक बच्चों की पिछड़ी हुई पढ़ाई को कवर कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जो परीक्षाएं मार्च में होनी चाहिए वह फरवरी होने से रिजल्ट और बच्चों की तैयारी दोनो की प्रभावित हो जाएंगी।
बता दें कि मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं-बारहवीं की परीक्षा हर साल एक या दो मार्च से शुरू होती थी। कोरोना के कारण दो साल से मंडल की परीक्षाएं टल रही थी। इसे देखते हुए माशिमं ने सत्र 2021 22 की परीक्षाएं 12 फरवरी से कराने का निर्णय लिया है। 10वीं-12वीं की मूल परीक्षा के साथ 12 फरवरी से ही प्रेक्टिकल परीक्षा होगी। सैद्धांतिक परीक्षा 20 मार्च तक संपन्न होगी। जबकि प्रायोगिक परीक्षा 30 मार्च तक संपन्न होगी।