बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और रेलवे चाइल्ड लाइन नौ साल पहले अपने परिवार से बिछड़ी एक किशोरी उसके परिवार से मिलाया है। गुरुवार को इस दौरान किशोरी के परिजन सहित सीडब्ल्यूसी और चाइल्ड लाइन सदस्य भी भावुक हो उठे जब माता-पिता, नाना-नानी और ताई-भाई सहित पूरा परिवार किशोरी को लेने पहुंचा। जिसके बाद किशोरी को परिजन को सौंप दिया गया।
दरअसल, किशोरी जनवरी 13 में शाम छह बजे घर से गायब हुई थी और एक घंटे में ही परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद से परिवार लगातार फोटो शेयर कर और अन्य माध्यम से बच्ची को ढूंढता रहा।
वहीं किशोरी गलती से छिंदवाड़ा से उदयपुर (राजस्थान) पहुंच गई थी। जहां उसे रेस्क्यू कर बालिका गृह में रखा गया था। उदयपुर-भोपाल बाल कल्याण समिति और चाइल्ड लाइन लगातार किशोरी के परिवार को खोज रही थी। जिसके बाद किशोरी के परिवार को छिंदवाड़ा के गांव परासिया से ढूंढ लिया गया।
चार घंटे के अंदर ही किशोरी के परिवार से संपर्क किया..
दरअसल, किशोरी के माता-पिता पहले भोपाल में रहकर काम करते थे। दादी से नाराज होकर वह अपने गांव से भोपाल आने के लिए निकल गई थी। वह गलत ट्रेन में बैठ गई। इस बीच उसने कई जगह ट्रेन बदली।
राजस्थान के एक शहर में उसे एक व्यक्ति अपने घर ले गया और घर का काम कराने लगा। बच्ची यहां से भाग निकली और पुलिस की नजर उस पर पड़ी। उसके बाद तत्कालीन उदयपुर समिति ने उसे अपने संरक्षण में लिया। रेलवे चाइल्ड लाइन कॉर्डिनेटर संजीव जोशी ने बताया कि उन्हें समिति सदस्य ब्रीज त्रिपाठी ने किशोरी के संबंध में जानकारी दी।
काउंसलिंग में किशोरी ने गांव का नाम परासिया बताया। संजीव जोशी ने बताया कि इसके पहले वह लोग भोपाल और इंदौर में किशोरी के परिवार को ढूंढ रहे थे। यह जानकारी मिलते ही छिंदवाड़ा क्षेत्र के परासिया थाने में संपर्क किया गया। यहां से किशोरी की गुमशुदगी रिपोर्ट की पुष्टि हो गईं। चार घंटे के अंदर ही किशोरी के परिवार से संपर्क हो गया।