भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपने ताजे प्रतिवेदन में कृषि विभाग के भ्रष्टाचार की कलई खोल दी है. कैग ने अपने प्रतिवेदन में कहां है कि धार, हरदा, बड़वानी, खरगोन सहित 10 जिलों में निजी बीज विक्रेता संस्थाओं से किसानों के लिए निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर बीज की खरीदी की. इसके कारण राज्य सरकार को 10 करोड़ 63 लाख का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा. गुणवत्ता में बीज अमानक पाए गए.

 बीते विधानसभा में प्रस्तुत कैग के प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि कृषि विकास विभाग द्वारा प्रत्येक किस्म के बीजों की दरें तय की जाती है. बीच खरीदी की जांच के लिए कैग 20 जिलों का चयन कर उनके अभिलेखों की जांच की. जांच में पता चला कि अलीराजपुर, अनूपपुर, अशोकनगर, बड़वानी, भिंड, धार, डिंडोरी, हरदा, जबलपुर, कटनी, खरगोन, नरसिंहपुर, नीमच, राजगढ़, सागर, सिवनी, श्योपुर और शिवपुरी जिले के किसानों के लिए राष्ट्रीय बीज निगम के अलावा साईनाथ बीज, मां गायत्री बीज, नेफेड बायो फर्टिलाइजर, श्री तिरुपति बालाजी, नुजीवीडू सीड्स, हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड और कावेरी सीट से निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर बीच खरीदी की गई. इसके कारण किसानों को दो करोड़ 56 लाख रुपए का अतिरिक्त लागत वहन करने के लिए मजबूर होना पड़ा. धार और खरगोन जिले में 2016 से 19 के दौरान बीजों की सर्वाधिक मात्रा की खरीदी उचित दरों पर की गई. जांच प्रतिवेदन के अनुसार धार ने चार करोड़ 71 लाख में 4280.23 कुंटल और खरगोन ने 4 करोड़ 87 लाख रुपए में 4241. 97 कुंटल बीच खरीदा. यानी दोनों जिलों में एनएससी से खरीदे गए बीच की उच्च दरों से 368% अधिक कीमत पर बीज खरीदा गया.

 अपात्र किसानों को बीजों का वितरण

2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसानों को बीच वितरित किए जाने थे. अभिलेखों की जांच में पता चला कि 2016-17 से 2018-2019 के दौरान अशोकनगर, बड़वानी, धार, डिंडोरी, हरदा, कटनी, खरगोन, नरसिंहपुर, राजगढ़, सिवनी शाजापुर और श्योपुर में 847 अपात्र किसानों को बीज वितरित किए गए