भोपाल: प्रदेश में अब भिखारियों को पकडऩे का अभियान चलेगा। इसके लिये राज्य के सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त डा. ई. रमेश कुमार ने सभी जिला कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों तथा नगर निगम आयुक्तों को निर्देश जारी किये हैं।

आयुक्त ने अपने निर्देशों में कहा है कि जिला प्रशासन स्थानीय निकाय, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों का दल बनाकर निरन्तर मुहीम चलायें और भिक्षावृत्ति करने वालों को पकड़ें। भिक्षावृत्ति में लिप्त बालकों को शिक्षा विभाग के आवासीय विद्यालयों में तथा 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के वरिष्ठ भिक्षुकों को जिले में संचालित वृध्दाश्रमों एवं दिव्यांगजन संस्थाओं में भर्ती किया जाये। इससे भिक्षावृत्ति में नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही इस अभियान के संबंध में समय-समय पर पुलिस प्रशासन के साथ समीक्षा भी की जाये।
आयुक्त ने कहा है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भिक्षावृत्ति एक सामाजिक बुराई है तथा इसे रोकने के लिये पूरे प्रदेश में भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम प्रभावशील है। भिखारियों तथा भिखारी अपराधियों के विरुध्द कार्यवाही के लिये न्यायालय प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट अथवा बाल न्यायालय सक्षम हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 48 साल पहले मप्र भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 बनाया गया था तथा इसे सिर्फ इंदौर एवं उज्जैन नगर निगम की सीमा में ही प्रभावशील किया गया था। परन्तु 3 फरवरी 2018 को राज्य सरकार ने इस अधिनियम को प्रदेश के सभी जिलों में लागू कर दिया था।