भोपाल। प्रदेश की शिवराज सरकार ने जिला योजना समिति संशोधन विधेयक भी राज्यपाल से वापस ले लिया है। यह विधेयक पिछली कमलनाथ सरकार के समय 20 दिसम्बर 2019 को विधानसभा में पारित हुआ था और इसे स्वीकृति के लिये राज्यपाल के पास भेजा गया था। यह विधेयक वापस होने से जिला योजना समिति के पहले बने प्रावधान यथावत लागू हो गये हैं। विधि विभाग ने बिल वापस लेने की पुष्टि की है।
पिछली कमलनाथ सरकार ने उक्त संशोधन विधेयक में प्रावधान कर दिया था कि सभी जिलों में जिला योजना समिति के सदस्यों की संख्या एक समान बीस होगी और इन सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष होगा। जबकि पहले प्रावधान था कि छह जिलों यथा श्योपुर, दतिया, उमरिया, नीमच, हरदा एवं डिण्डौरी में 10, नौ जिलों यथा पन्ना, दमोह, बड़वानी, होशंगाबाद, कटनी, नरसिंहपुर, अशोकनगर, अनूपपुर एवं बुरहानपुर में 15 तथा 33 जिलों यथा मुरैना, भिण्ड, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, छतरपुर, मंदसौर, सतना, शहडोल, सीधी, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खरगौन, खण्डवा, राजगढ़, विदिशा, भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, बालाघाट, छिन्दवाड़ा, सिवनी, सागर, टीकमगढ़, रीवा, इंदौर, जबलपुर तथा मण्डला में 20 सदस्य जिला योजना समिति में नियुक्त होंगे। चार नये जिलों यथा सिंगरौली, निवाड़ी, आगर मालवा एवं
अलीराजपुर के लिये समिति संबंधी कोई प्रावधान नहीं था। हालांकि इनमें प्रशासकीय आदेश से जिला योजना समितियां गठित हैं।
उल्लेखनीय है कि कमलनाथ सरकार के समय 20 दिसम्बर 2019 को मप्र विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक भी विधानसभा में पारित हुआ था लेकिन शिवराज सरकार ने इसे भी राज्यपाल से वापस ले लिया था।
विधानसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि विधानसभा ने इन दो विधेयकों को पारित कर विधि विभाग के पास राज्यपाल की मंजूरी लेने के लिये भेज दिया था परन्तु अभी तक मंजूरी नहीं आई है। विधि विभाग ही इन्हें वापस लेने की कार्यवाही करता है। वापसी की सूचना मिलने पर इसे विधानसभा के सत्र में रखा जायेगा।