माइग्रेन में सिर के आधे भाग में दर्द होता है। इसलिए माइग्रेन को अर्ध्कपारी भी कहते हैं। यह दर्द हमारी धमनियों में फैलाव के कारण होता है। जब धमनियों में फैलाव की स्थिति आती है तो वह हमारी नाड़ी तंतु को भी प्रभावित करती है जिससे रसायन स्रावित होते हैं। यह रसायन ही उत्तेजना एवं दर्द को जन्म देते हैं। जैसे-जैसे धमनियों का फैलाव बढ़ता है वैसे-वैसे दर्द भी बढ़ता है।
अंधेरे में रहना पसंद करते हैं:
जिन लोगों को अधिक रोशनी व अधिक आवाज से परेशानी होती है वे सामान्यतया इस दर्द के दौरान शांतिपूर्वक एक अंधकारमय कमरे में रहना पसंद करते हैं। यह दर्द 4 से 72 घंटों तक रहता है। औसतन 40 से 60 प्रतिशत माइग्रेन अटैक में कुछ समय पहले ही दिखाई देने लगते है। जैसे नींद ना आना, चिड़चिड़ापन बेहोशी होना, तनाव, उदासी इत्यादि मरीज व उसके परिवार के सदस्य माइग्रेन के इन लक्षणों को पहचान कर समय पर किसी मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं।
क्या सकता है इलाज:
पहले दवाओं को कम मात्रा में शुरू करके धीरे-धीरे इसकी मात्रा को बढ़ाया जाना चाहिए इससे दवाओं के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है।
कई हैं लक्षण माइग्रेन के:
माइग्रेन सामान्यतः हमारे शरीर के सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है जो कि दर्द एवं उत्तेजना जैसे अनुभवों को नियंत्रित करने का कार्य करता है। इस नर्वस सिस्टम के अधिक क्रियाशील हो जाने से चक्कर आना, जी मचलना, उल्टी होना एवं डायरिया इत्यादि कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
माइग्रेन का दर्द कभी-कभी सिर के अग्रभाग, आंखों के आसपास या फिर सिर के पिछले भाग में भी होता है। माइग्रेन हमारी दैनिक दिनचर्या के कामों जैसे सीढ़ियां चढ़ना इत्यादि से भी उत्तेजित होता है। इसके परिणामस्वरूप चक्कर आना, उल्टी आना, डायरिया, हाथों व पैरों का ठंडा पड़ जाना, अधिक रोशनी व आवाज से दिक्कत होना इत्यादि प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
कम लोग ही सही इलाज कराते हैं:
आंकड़ों के अनुसार देश में सिर्फ 2 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो माइग्रेन को गंभीरता से लेकर उचित उपचार एवं परामर्श लेते हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ये समस्या ज्यादा होती है और बहुत कम ही महिलाएं इसका उपचार कराती है। वे एक सामान्य बीमारी समझकर दर्दनाशक दवाएं खाती है व बिना उचित इलाज के जीती रहती हैं। वे इसे तब तक अनदेखा करती जब तक ये किसी गंभीर बीमारी का रूप नहीं ले लेती है।
दिन प्रतिदिन बढ़ते तनाव व चिंताओं ने हमें बहुत सी बीमारियां उपहार स्वरूप दी है जिसमें सबसे अधिक तकलीफ देने वाली बीमारी है 'माइग्रेन'। दर्द निवारक दवाएं इस रोग का इलाज नहीं है। तंत्रिका तंत्र से संबंधित दवाएं कारगर साबित होती हैं।
हमेशा दर्द निवारक फायदा नहीं करती:
सिरदर्द के अपने कई कारण हो सकते हैं। पर इसका इलाज सिर्फ एक दर्द नाशक दवा नहीं हो सकती है। कई बार ये दवाएं खतरनाक साबित हो सकती है। इन दर्द निवारक दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से कई बीमारियां होने का भी खतरा रहता है। जैसे उच्च व निम्न रक्तचाप, हृदय व फेफड़ों में परेशानी, मस्तिष्क विकार, नींद की कमी, नपुंसकता, पौष्टिक अल्सर, गैस विकास, गुर्दे व लिवर खराब होना इत्यादि।
दवा के बहुत ज्यादा सेवन से ये दवाएं असर करना बंद कर देती हैं व सिरदर्द रोकने में नाकाम हो सकती हैं। इसलिए बेहतर विकल्प ये है कि सिरदर्द होने पर खुद से दवाएं लेने के बजाय किसी मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए जो बेहतर उपचार बता सकता है।
माइग्रेन के उचित उपचार के लिए कुछ परीक्षणों की आवश्यकता होती है जिसमें रक्त की जांच, ब्रेन स्कैनिंग (सीटी या एमआरआई तथा स्पाइनल टेप) शामिल हैं। माइग्रेन के मरीजों के लिए कुछ जरुरी याद रखने योग्य बातें
1. समय पर सोना व जागना चाहिए।
2. नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
3. बहुत ज्यादा देर तक भूखे नहीं रहना चाहिए ।
4. तनाव को नियंत्रित करना चाहिए।
5. बहुत तेज व चुभने वाली रोशनी से बचना चाहिए।