भोपाल. भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रदेश की 2 जांच एजेंसियां लोकायुक्त एवं ईओडब्ल्यू गंभीरता से नहीं ले रही है. जांच एजेंसियां की सुस्त रफ्तार के चलते दागी अफसरों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है. दिलचस्प पहलू यह है कि जांच के चलते अखिल भारतीय सेवा के अफसर प्रमोशन और प्राइम पोस्टिंग लेते हुए रिटायर भी हो गए पर उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. जांच एजेंसियों की कार्यशैली को लेकर राज्य सरकार किंकर्तव्यविमूढ़ बनी हुई है .

पिछले दिनों विधानसभा सत्र में दी गई जानकारी के आधार पर हकीकत तलाशने की प्रयास किया तो कई दिलचस्प तथ्य प्रकाश में आए. मसलन लोकायुक्त संगठन की सूची में अखिल भारतीय वन सेवा के तीन अफसरों के नाम शासकीय आवास में अनाधिकृत रहते हुए किराया ना जमा करने का था. तीन अधिकारियों में दो रिटायर हो गए और एक अफसर बांधवगढ़ नेशनल पार्क में संचालक के पद पर पदस्थ हैं. तीनों ही अधिकारियों ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किराया राशि जमा कर दी फिर भी उनके नाम लोकायुक्त संगठन की सूची से डिलीट नहीं किए गए. इसी प्रकार यूके सुबुद्धि और मनोज अग्रवाल के खिलाफ एक दशक पहले मामला दर्ज हुआ था, जो आज तक लोकायुक्त संगठन जांच पूरी नहीं कर सका है. इस बीच दोनों ही अफसर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद तक प्रमोट हो चुके हैं. यह बात अलग है कि आयुक्त उद्यानिकी के पद से हटाए गए मनोज अग्रवाल के खिलाफ पिछले दिनों ईओडब्ल्यू में नया मामला दर्ज किया गया है. अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ललित दाहिमा के खिलाफ भी 1 दशक से अधिक समय से लोकायुक्त संगठन में मामला दर्ज है. जांच के चलते ही ललित दाहिमा डिप्टी कलेक्टर से आईएएस बन गए हैं. आईएएस दाहिमा जांच कहां तक पहुंची यह अभी भी अनिश्चितता की फाइल में बंद है. यानी लोकायुक्त संगठन और ईओडब्ल्यू में दर्ज मामले की जांच कछुआ चाल से होने की वजह से अखिल भारतीय सेवा के अवसर दोहरी मानसिकता में काम कर रहे हैं.

 *दागी अफसरों की सूची में टॉप पर हैं आईएफएस*
 विधानसभा को दी गई जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय सेवा के दागी अफसरों की सूची में अखिल भारतीय वन सेवा के अफसर टॉप पर है.लोकायुक्त संगठन और ईओडब्ल्यू जांच एजेंसियों की सूची के अनुसार 70 आईएफएस अफसरों के खिलाफ जांच लंबित है. इनमें से कुछ अफसर रिटायर भी हो चुके हैं और कुछ निलंबित. अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी दूसरे नंबर पर है. लोकायुक्त संगठन और ईओडब्ल्यू जांच एजेंसियों की सूची के 63 अधिकारियों के नाम दर्ज हैं.लोकायुक्त में 31 आईएफएस, ईओडब्ल्यू में 39 आईएफएस के खिलाफ जांच लंबित है. जबकि 35 आईएएस के खिलाफ लोकायुक्त और 28 के विरुद्ध ईओडब्ल्यू में जांच चल रही है. भ्रष्टाचार के मामले में आईपीएस अधिकारी बेहतर नजर आए. करीब  20 आईपीएस के खिलाफ अनियमितताओं की शिकायतें हैं.

 *दागी अफसरों में चर्चित नाम*
 लोकायुक्त में जिन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच लंबित है, उनमें बसंत कुर्रे, ललित दाहिमा, जेड यू शेख, वीरेंद्र कुमार, अशोक कुमार चौहान  हैं. राप्रसे के विवेक सिंह, मनीषा सेतिया, पवन कुमार जैन, निलय सतभैया, एनपी नामदेव, पंकज शर्मा. इसी तरह रापुसे के अधिकारी अनिल कुमार मिश्रा, सुशील रंजन सिंह, देवेंद्र सिरोलिया, विकास पाठक, सिद्धार्थ चौधरी के खिलाफ भी शिकायतें दर्ज हैं.  जिन रिटायर आईएफएस के विरुद्ध जांच पेंडिंग है, उनमें एपीसीसीएफ रामदास महला, एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल, एपीसीसीएफ एलएस रावत, एपीएस सेंगर, बीएस अन्नागिरी, अजय यादव, प्रशांत कुमार सिंह, गौरव चौधरी, यूके सुबुद्धि, पीके वर्मा, एम कालीदुरई, अजीत श्रीवास्तव, पीके सिंह, डॉ. दिलीप कुमार, बीएस अन्नागिरी, अजय यादव, राजीव कुमार मिश्रा, प्रशांत कुमार सिंह, बृजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, वासु कनोजिया, मीना मिश्रा, चंद्रशेखर सिंह और पंकज श्रीवास्तव प्रमुख हैं. एनएस डुगरियाल, विनय वर्मन, पीसी दुबे, बीबी सिंह, ओपी उचाड़िया, आरसी शर्मा, कैलाश प्रसाद बांगर, विजय कुमार नीमा, आरके गुप्ता, आरवी शर्मा, अनिल कुमार श्रीवास्तव तथा आरएस सिकरवार यह सभी आईएफएस अफसर रिटायर्ड हो चुके हैं।.