भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्णय के बाद भी वन विभाग के सभी डिपो से 1 दिसम्बर 2021 से वनोपज की ई-नीलामी नहीं हो पायी। इसका मूल कारण ई-नीलामी के साफ्टवेयर का अभी तक सिक्युरिटी आडिट नहीं हो पाना है।
 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के वन डिपो से सागौन, अन्य लकडिय़ों, जलाऊ लकड़ी एवं बांस की नीलामी की जाती है। इनकी नीलामी मेनुअली हो रही थी जिसमें ठेकेदार समूह बनाकर सस्ते में यह लकड़ी खरीद रहे थे। पिछले दिनों सीएम ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में निर्णय लिया था कि 1 दिसम्बर से सभी वन डिपो में ई-नीलामी की जायेगी जिससे वन विभाग की आय में इजाफा हो।

लेकिन वन विभाग ने  सभी वन डिपो में दिसम्बर माह की नीलामी का जो कार्यक्रम जारी किया उसमें कहीं भी ई-नीलामी नहीं रखी गई है। फिर अचानक टिमरनी में 30 दिसम्बर को ई-नीलामी रख दी गई।  पूरे प्रदेश में एक साथ ई-नीलामी न करने का जब इसका कारण ढूंढा गया तो पता चला कि सरकारी एजेन्सी मैप-आईटी ने ई-नीलामी के साफ्टवेयर को भारत सरकार की अधिकृत एजेन्सी से सिक्युरिटी आडिट नहीं कराया है।

करीब 12 लाख रुपये फीस भरकर वन विभाग ने सिक्युरिटी आर्डिट के लिये आवेदन किया हुआ है परन्तु सिक्युरिटी आर्डि का प्रमाण-पत्र मिलने में अभी काफी दिन लगेंगे। मैप-आईटी भी साफ्टवेयर के सिक्युरिटी आर्डिट के लिये मान्यता प्राप्त एजेन्सी है परन्तु ई-टेण्डरिंग के घोटालों को देखते हुये यह सिक्युरिटी आडिट केंद्र सरकार की अधिकृत एजेन्सी से कराने का वन विभाग ने निर्णय लिया है।

इधर वन विभाग ने रायसेन जिले के गैरतपुर वन डिपो में पायलट प्रोजेक्ट के तहत गत 27 नवम्बर 2021 को ई-नीलामी रखी थी परन्तु जागरुकता के अभाव में बहुत कम ठेकेदारों ने इसमें ऑनलाईन भाग लिया जिसका नतीजा यह रहा कि सिर्फ एक ठेकेदार ने ही सारी लकडिय़ां क्रय कर ली, वह भी उसी आफसेट प्राईज पर जो वन विभाग ने तय कर रखी थी इससे कम में नहीं बेची जायेगी। ठेकेदार ने इस आफसेट प्राईज से ज्यादा बोली नहीं लगाई।