मूली एक ऐसी सब्जी है जिसकी जड़ से लेकर पत्ते तक का उपभोग किया जाता है. इसके पत्तों की सब्जी को मुलवाती कहते हैं, जो बहुत स्वादिष्ट और सेहतमंद होती है. मूली मामूली चिरकी, गर्म, स्वादिष्ट और भोजन पचाने में सहायक होती है. इसको खाने से वात, पित्त और कफ तीनों दोषों का नाश होता है.
सांस, गले, आँखों की बीमारियों में तो इससे राहत मिलती ही है, इससे पेट के कीटाणु भी मरते हैं और भूख भी बढ़ती है. बवासीर के रोगियों के लिए तो यह बहुत अच्छी औषधि है. इससे यूरिनरी डिसऑर्डर्स भी दूर होते हैं. मूली को भोजन के साथ ही खाना अधिक लाभदायक होता है. कई लोग वैसे ही नमक लगाकर मूली को खाते हैं. बड़ी मूली के बजाय छोटी मूली ज्यादा गुणकारी होती है.
आयुर्वेद के अनुसार, मूली का रस और गाय का घी दो-दो तोला मिलाकर चाटने से बवासीर में लाभ होता है.
मूली के साथ सलाद का मज़ा और ज़ायका कई गुणा बढ़ जाता है. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मूली से मूत्राशय की पथरी भी गल जाती है. इसके लिए चार चम्मच मूली के बीच दो कप पानी में उबाला जाए. जब आधा कप पानी बचे तब उसे छानकर पी लिया जाए. ऐसा कुछ दिन करने पर मूत्राशय की पथरी गलकर निकल जाती है.
आजकल तेज एसिडिटी की समस्या बहुत आम हो गयी है. इसका इलाज भी मूली से किया जा सकता है. ताज़ी और नरम मूली के टुकड़े पीसी हुई मिस्री के साथ खाने से लाभ होता है. पीलिया और लीवर रोगों में कच्ची मूली का रोजाना सेवन बहुत लाभकारी होता है. इससे मूत्र के द्वारा शरीर के विजातीय द्रव्य और विषाणु धीरे-धीरे निकल जाते हैं.
मूली के बीज पाँच ग्राम खूब पीसकर एक गिलास में पानी घोलकर छान लिए जाएँ. इसमें दो चम्मच मूली का ताजा रस मिलाकर पीस लें. सुबह-दोपहर और शाम को इसके साथ सिस्टन नाम की दो-दो गोलियां गोलियां खाई जाए. इससे पेशाब में जलन, रुकावट और यूरिनरी ट्रेक से जुड़े विकार ख़त्म हो जाते हैं.
बदहजमी बहुत आम शिकायत है, जिससे हर तीसरा-चौथा व्यक्ति जूझ रहा है. खाना पचाने के लिए लोग तरह-तरह की दवाएं लेते हैं. लेकिन मूली का प्रयोग करके देखिये. सलाद में इसका रोज़ाना सेवन किया जाएय तो बदहजमी ख़त्म हो जाएगी. थोड़ा-सा नामक भी मिला लिया जाए तो स्वाद का कहना ही क्या! सलाद में पके टमाटर, मूली और ककड़ी का मिश्रण बहुत स्वादिष्ट और पाचक होता है.
इसके अलावा मूली पेट के अन्य कुछ रोगों में भी बहुत फायदा करती है. तो रोजाना खाएं मूली और भगाइए कई रोगों को.