भोपाल: जल संसाधन विभाग ने कोष एवं लेखा आपत्तियों के बाद भी ठेकेदारों को नियम विरुद्ध 200 करोड़ रुपए के भुगतान कर दिए है. अब उन्हें वसूलने में विभाग के अफसरों को पसीना छूट रहा है. गड़बड़झाला नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ की कर्म स्थली छिंदवाड़ा और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के गृह जिले रीवा में हुआ है.

संचालनालय कोष एवं लेखा के आंतरिक लेखा परीक्षा दल द्वारा विभिन्न विभागों के आरण एवं संवितरण के ऑडिट में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का खुलासा किया गया है. लेखा परीक्षा की ऑडिट में खुलासा हुआ है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 में अधिकतर विभागों ने एक जैसी अनियमितताएं की हैं. आयुक्त कोष एवं लेखा ने सभी विभागों के प्रमुखों को पत्र लिखते हुए कहा है कि प्रदेश में आर्थिक संकट के बीच शासन की संचित निधि से इस प्रकार शासकीय धन का अपव्यय नियमित व और अनुचित लाभ करना आपत्तिजनक है. पत्र में आगे कहा गया है कि वे शासकीय राजस्व प्राप्तियों को अतिशीघ्र प्राप्त कर शासकीय खजाने में जमा करें. आंतरिक ऑडिट में जल संसाधन विभाग के छिंदवाड़ा और रीवा में नियम विरुद्ध सुरक्षा निधि प्राप्त किए बिना ही करोड़ों का अग्रिम भुगतान कर दिया गया. यही नहीं, स्वीकृत पद से अधिक कर्मचारी पदस्थ कर वेतन भत्तों पर अनियमित व्यय करना, शासकीय सेवकों को नियम विरुद्ध तरीके से भत्तों का भुगतान करना और वित्त विभाग की अनुमति के बिना बैंक खातों में करीब 200 करोड़ में का संधारण करने जैसी गड़बड़ियां की गई है.

 विभागों में महत्वपूर्ण गड़बड़ियों के प्रमुख बिंदु :


 - बिना आवश्यकता से अधिक धनराशि राज्य की संचित निधि से आहरित कर बैंक खातों में जमा करना.
- वसूली योग्य राजस्व राशि की वसूली नहीं करना,  विलंब से वसूल करना और संचित निधि में जमा नहीं करना.
- शासकीय सेवकों में प्रदाय अग्रिम राशि की लंबी अवधि तक समायोजन और ब्याज की वसूली नहीं करना.
- निर्धारित दरों से अधिक दरों पर सामग्री क्रय कर शासकीय धन की हानि पहुंचाना.
- लोक निर्माण विभाग से अनापत्ति प्राप्त किए बिना ही निजी फर्मों से निर्माण संबंधी कार्य कराना.
- ठेकेदारों द्वारा जमा सुरक्षा निधि संबंधी अभिलेखों का अव्यवस्थित संधारण एवं निर्धारण प्रक्रिया का सत्यापन के बिना ठेकेदारों को सुरक्षा निधि की वापसी कर त्रुटिपूर्ण भुगतान करना.
- अनुदान के रूप में जारी की गई राशि का अनुदान उद्देश्य पर ही व्यय संबंधी उपयोगिता प्रमाण पत्र सत्यापन नहीं करना. कोषालय से आहरित राशि का अनियमित रूप से दुरुपयोग करना.
- शासकीय कर्मचारियों के बैंक खातों में सेवा प्रदायकर्ता, संस्थाओं और एजेंसियों को किए जाने वाला भुगतान नियम विरुद्ध तरीके से जमा करना.
- डीजल, पेट्रोल, वाहन मरम्मत, दूरभाष के लिए निर्धारित व सीमा का पालन नहीं कर अधिक व्यय करना.
- विगत वर्षों में देयता का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष के बजट से बिना सक्षम स्वीकृति करना.
- विभिन्न योजनाओं कार्यक्रमों के लिए निर्धारित बजट से कार्यालयीन व्यय करना.