भोपाल: राज्य के जल संसाधन विभाग के एक अनुविभागीय अधिकारी को अनियमितता संबंधी एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कार्यपालन यंत्री के पद का प्रभार दे दिया गया। इस मामले की शिकायत कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डा. गोविन्द सिंह ने सीधे जल संसाधन विभाग के सचिव को की, जिस पर अब आरोपों की बिन्दुवार जांच करने के लिये ईएनसी ने केंद्रीय यांत्रिकी इकाई भोपाल के संचालक एके पाण्डे को जांचकत्र्ता अधिकारी नियुक्त कर दिया है तथा पन्द्रह दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
उक्त शिकायत राजगढ़ में पदस्थ तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी भास्कर प्रकाश सक्सेना जोकि वर्तमान में ग्वालियर में कार्यपालन यंत्री के पद पर पदस्थ हैं, के विरुध्द की गई है। आरोप है कि राजगढ़ में पदस्थ रहने के दौरान सक्सेना ने मार्च 2017 में 20 लाख रुपये के आरएस ज्वाईस्ट एवं एच बीम गायब कर बेच दिये। तत्समय के कार्यपालन यंत्री नंदराम सोलंकी ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की जो धारा 420, 409, 467, 168 भादवि के तहत दर्ज कर लिया गया तथा इस केस में ठेकेदार चंदन सिंह परिहार एवं भास्कर प्रकाश सक्सेना आरोपी बनाये गये। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद सक्सेना को कार्यपालन यंत्री का प्रभार दे दिया गया जबकि नियमानुसार ऐसे अधिकारी की न्यायालय के निर्णय होने तक मैदानी पदस्थापना नहीं की जाना चाहिये।
इसके अलावा, सक्सेना पर आरोप है कि दतिया में प्रभार लेते ही तत्समय के कार्यपालन यंत्री मनोज मुकेश द्वारा काटे गये फर्मों के 15 लाख रुपयों के चेक ट्रेजरी में जाकर वापस कराये गये और चार दिन बाद उन्हीं फर्मों को प्रभारी कार्यपालन यंत्री सक्सेना के द्वारा चेक काटे गये। सक्सेना पर महुअर बांध/मड़ीखेड़ा बांध/अंगूरी बैराज/मोहनी पिकअप वियर पर 15 लाख रुपये के सात पीस वर्क 8 लाख रुपये के सीलों के आर्डर बिना ई-टेण्डरिंग के एक ठेकेदार को दे दिये गये।