कॉडर रिव्यू के अपने ही जाल में फसा वन महकमा

केंद्र ने पूछा- पहले से इतने पीसीसीएफ तो नए क्यों

भोपाल,  भारतीय वन सेवा के मप्र कॉडर के अफसरों को कॉडर रिव्यू में गहरी निराशा हाथ लगी है। केंद्र सरकार ने प्रधान मुख्य वनसंरक्षक यानि

पीसीसीएफ के तीन नए पदों के प्रस्ताव में पेच फंसा दिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि पीसीसीएफ के पद कॉडर की कुल संख्या के दो प्रतिशत होना चाहिए। मध्यप्रदेश में इससे ज्यादा पीसीसीएफ पहले से पदस्थ हैं, तो फिर नए पद क्यों? अब केंद्र सरकार के इस प्रश्न का उत्तर विभाग नहीं दे पा रहा है।

दरअसल मप्र में आईएएस अफसरों ने अपनी पदोपतित के कई नये रास्ते तलाश रखे है। इसके चलते शीर्ष पर अफसरों की भरमार है और नीचे यानि मैदानो स्तर पर अमले का टोटा है। अभी भी पहले से पीसीसीएफ के चार और

वन बल प्रमुख का एक पद स्वीकृत है। वहीं नान कॉडर में पांच पीसीसीएफ कार्यरत हैं। अगले साल सेवानिवृत होने वाले अधिकारियों को पदोनित दिलाने के लिए वन विभाग दो साल से सक्रिय है। वर्ष 2018 में मिड टर्म कॉडर रिव्यू के दौरान भी विभाग ने पीसीसीएफ के दो पद मांगे थे, जो नहीं मिले। वर्ष 2020 में रिव्यू होना था। जिसका प्रस्ताव प्रदेश से वर्ष 2021 में केंद्र सरकार को भेजा गया। इसमें पीसीसीएफ के पद पांच से बढ़ाकर आठ करने का अनुरोध किया गया था। विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी), ग्रीन • इंडिया मिशन और मानव संसाधन (एचआरडी) शाखा के लिए ये पद मांगे थे।

बताया जात है कि शुरूआत में इन पदों पर सहमति भी बन गई थी, पर केंद्र सरकार में अधिकारी बदल गए और नए अधिकारी ने पीसीसीएफ के तीन नए पद देने के औचित्य पर सवाल उठा दिए। केंद्र सरकार ने कहा किप्रदेश कॉडर में आइएफएस के 180 पद हैं। इसके दो प्रतिशत ही पीसीसीएफ के पद दिए

जा सकते हैं। वर्तमान में प्रदेश में चार पीसीसीएफ और एक वन बल प्रमुख हैं। यानी पांच पीसीसीएफ पदस्थ है। इसके विरुद्ध पांच नान कॉडर में हैं। इसलिए अब तीन पद और नहीं बढ़ाए जा सकते हैं। नियमों का हवाला देकर की गई मनाही का प्रदेश के वन अधिकारी कोई तोड़ नहीं निकाल पा रहे हैं। आखिर विभाग ने ग्रीन इंडिया मिशन के उपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक के. रमन को पदोन्नत करने का प्रस्ताव भेज दिया। तर्क यह दिया गया है कि रमन सेवानिवृत होने वाले हैं। इसलिए उन्हें पदोत्रत किया जाना उचित होगा। सूत्रों का कहना है कि कॉडर रिव्यू प्रक्रिया केंद्र सरकार में लंबित है, इसलिए रमन का प्रस्ताव अलग से भेजा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वन विभाग इकलौता ऐसा विभाग है। जिसमें अधिकारियों को सेवानिवृति से कुछ घंटे पहले या बाद में भी पदोत्रत कर दिया जाता है। उधर मप्र पुलिस के कॉडर में भी यही हाल हैं। आईपीएस अफसरों की पदोत्रति के लिये शीर्ष पर कई पद बना रखें हैं।