भोपाल. अखिल भारतीय सेवा की तीनों सेवाओं में बंद सेवा के अधिकार अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी बिरादरी के माथे पर कलंकित टीका चिपका दिया है. जंगल महकमे में 4 अधिकारी निलंबित है, जिससे अखिल भारतीय स्तर पर आईएफएस की छवि धूमिल हो रही है. हनी ट्रैप में भले ही आईएसपीसी मीणा का नाम सुर्खियों में रहा हो किंतु उन्हें निलंबित नहीं किया गया जबकि लैंगिक उत्पीड़न के मामले में एपीसीसीएफ मोहन मीणा निलंबित हो गए है. यह बात अलग है कि बिरादरी के दबाव में उनके खिलाफ महिला प्रताड़ना एक्ट के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सका है. 1987 बैच के आईएफएस अधिकारी डॉ बीके सिंह आय से अधिक संपत्ति के मामले में 7 साल से निलंबित चल रहे हैं. नाला में चालान प्रस्तुत हो गया है किंतु फैसला अभी लंबित है.
मोहन मीणा : निलंबन की अवधि बढ़ी
1994 बैच के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा 19 अगस्त से निलंबित है. उनके निलंबन की अवधि 1 महीने और बढ़ा दी गई है. मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी राज्य शासन द्वारा जारी आरोप पत्र को अभी तक मोहन मीणा को नहीं दे सके हैं. इस बीच मीणा ने 30 दिन की अवधि का उल्लेख करते हुए स्वता बहाली का आवेदन भी दे दिया था. हालांकि उनका आवेदन प्रभारी वन बल प्रमुख ने खारिज कर दिया है. मोहन मीणा को महिला कर्मचारियों के साथ अनुचित और अश्लील हरकतें करने एवं लैंगिक उत्पीड़न के मामले में दोषी करार दिया गया है. यही नहीं, मीणा को अपने मातहत कर्मचारियों पर दबाव बनाकर पुत्र के बैंक अकाउंट में ₹30000 डिपाजिट कराने के मामले में भी दोषी ठहराया गया है.
देवांशु शेखर : दौड़ने लगी बहाली की फाइल
भारतीय वन सेवा 2011 के अधिकारी देवांशु शेखर 21 दिसंबर 2020 से निलंबित है. शेखर को उत्तर शहडोल वन मंडल में पदस्थी के दौरान आर्थिक घोटाले के मामले में निलंबित किया गया हैं. उत्तर वन मंडल शहडोल में पदस्थ रहते हुए देवांशु शेखर ने लघु वनोपज संघ के बजट से कागजों पर सड़क बनवा कर 60 70 लाख के घोटाले को अंजाम दिया. वन मंत्री विजय शाह ने घोटाले के मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए थे किंतु विभागीय अफसरों ने ऐसा नहीं किया. सीधी भर्ती के आईएफएस अधिकारी शेखर को बचाने के लिए शीर्षस्थ अधिकारियों ने अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध नहीं कराया. अब उनके बहाली की तैयारी शुरू हो गई है. बहाली संबंधित फाइल मंत्रालय में मुंह करने लगी है.
एसके गुप्ता: बहाली की कवायद तेज
2008 बैच के आईएफएस शैलेंद्र गुप्ता को वनविभाग मंत्रालय ने 6 फरवरी को जारी कर निलंबित कर दिया. मंडला उत्पादन वनमंडल के अंतर्गत आने वाले कालपी डिपो के नीलम में गंभीर वित्तीय अनियमित्ताओं के लिए शैलेंद्र कुमार गुप्ता वनमंडलाधिकारी उत्पादन वनमंडल मंडला को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया है. गुप्ता ने अपने चहेते टिंबर ठेकेदारों द्वारा बोली गई नीलामी राशि को कम करके उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाया. वन विभाग ने उन्हें आरोप पत्र भी जारी कर दिया है. गुप्ता ने आरोप पत्र का जवाब भी दे दिया है. अपने जवाब में गुप्ता ने उल्लेख किया है कि कोरोना के कारण ठेकेदारों को काफी दूरी पर बिठाया गया था. उनकी आवाज उन तक ठीक से नहीं पहुंच रही थी, जिसके कारण लगाई गई बोली राशि और उनके द्वारा सुनी गई राशि में अंतर पाया गया.
डॉ बीके सिंह: कभी भी हो सकता है फैसला
1987 बैच के आईएफएस डॉ बीके सिंह उज्जैन मुख्य वन संरक्षक के पद पर रहते हुए आय से अधिक धन अर्जित करने के मामले में वर्ष 2014 से निलंबित है. 6 फरवरी 2013 को लोकायुक्त ने उनके यहां छापामारी की थी. लोकायुक्त की छापामार कार्यवाही में डॉक्टर सिंह के पास से 50 करोड़ की संपत्ति होना पाया गया था. उनके शासकीय बंगले से आठ रजिस्ट्री, 6 बैंक पासबुक, 11 एफडी, 12 म्यूच्यूअल फंड और 6.48 लाख रुपए नकदी जब की गई थी. लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में चालान भी पेश कर दिया है. शीघ्र ही फैसले उनके खिलाफ आने की संभावना है. बीके सिंह अपने निलंबन अवधि में ही सेवानिवृत्ति की संभावना उनके बिरादरी के लोग कह रहे हैं. वे फरवरी 2023 में रिटायर होंगे.