जनजातीय संग्रहालय में आज से शुरू होगा चार दिनी पुतुल समारोह..
कठपुतलियां बताएंगी पौराणिक चरित्रों की गाथाएं:
कठपुतली कला की विविध शैलियों पर एकाग्र पुतुल समारोह की शुरुआत आज से हो रही है। चार दिनी इस आयोजन का सूत्रधार जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी है। जनजातीय संग्रहालय में समारोह के दौरान कठपुतली के माध्यम से ऐतिहासिक और पौराणिक चरित्रों एवं कथा-कहानियों को दिखाया जाएगा।
इस आयोजन में वर्तमान समय में इस कला में समकालीन विषयों को भी आधार रूप में ग्रहण किया गया है, जिससे युवा पीढ़ी को सदियों से चली आ रही इस विधा और इसके माध्यम से जीवन मूल्यों को संरक्षित करने की विधि को बताया जा सके।
पुतुल समारोह में प्रस्तुतियां प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से होंगी। उल्लेखनीय है कि मप्र जनजातीय संग्रहालय में प्रतिवर्ष यह आयोजन किया जाता है। दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। कार्यक्रम के दौरान सभी के लिए कोरोना गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य होगा।
पहले दिन धागा-कटोरी आज समारोह के पहले दिन धागा, कटोरी और छड़ शैली में श्रवण कुमार की कथा एवं जय श्री कृष्ण कथा की प्रस्तुति, जयपुर के बिलूराम भाट एवं साथी द्वारा दी जाएगी। कल 21 अक्टूबर को दस्ताना और छड़ शैली में श्री रामलीला एवं प्रणाम काकोरी की प्रस्तुति, शाहजहांपुर के कमान सिंह कर्णधार एवं साथियों द्वारा दी जाएगी।
22 अक्टूबर को छड़ कटोरी और मपेट शैली में सोने की चूड़ी और पिंजरे में शेर की प्रस्तुति, नई दिल्ली के अक्षय भाट एवं साथी पेश करेंगे। समारोह के चौथे दिन 23 अक्टूबर को दस्ताना और छड़ शैली में गुलाबो- सिताबो एवं वीरांगना अवंती बाई की प्रस्तुति, लखनऊ के प्रदीप नाथ त्रिपाठी एवं साथियों द्वारा, 24 अक्टूबर को धागा, कटोरी और मपेट शैली में एक बदमाश भेड़िया एवं साथी की प्रस्तुति मुंबई के कपिल देव एवं साथियों द्वारा दी जाएगी।