भोपाल: प्रदेश में 14 लाख 46 हजार 104.87 हेक्टेयर भूमि अभी तक वन विभाग के खाते में दर्ज नहीं हुई है। इसे वन विभाग के पक्ष में दर्ज करने के लिये राजस्व अधिकारियों द्वारा पिछले कई दशकों से जांच की जा रही है। प्राप्त अधिकृत जानकारी के अनुसार, भारतीय वन अधिनियम 1927 के अन्तर्गत अधिसूचित संरक्षित वन एवं प्रस्तावित आरक्षित वन भूमियों पर तत्समय राजस्व अभिलेखों में दर्ज व्यक्ति एवं समुदाय के अधिकारों को, सक्षम राजस्व अधिकारियों द्वारा जांच, जो अर्ध न्यायिक स्वरूप की हैं, लंबित रहने के कारण वन विभाग के पक्ष में अभिलिखित नहीं किया जा सका है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में, दर्ज व्यक्ति एवं समुदाय के अधिकारों के स्वरूपों की जानकारी सक्षम राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा, जांच कर अभिलिखित की जा रही हैं, जिसे अभिलेखन उपरांत वन विभाग के संबंधित वनखण्ड इतिहास, कार्य-आयोजना एवं निस्तार पत्रक में दर्ज की जायेगी। यह संरक्षित वन भूमि, राजस्व अभिलेखों में मुख्य रूप से छोटे झाड़ के जंगल, बड़े झाड़ के जंगल, पहाड़-चट्टान, चरनोई, घास, जंगल खुर्द, जंगलात आदि मद एवं प्रयोजनों हेतु दर्ज रही हैं। भारतीय वन अधिनियम 1927 के अन्तर्गत 14 लाख 46 हजार 104.87 हेक्टेयर क्षेत्र में जांच वर्तमान में लंबित है।
बिगड़े वनों को सुधारने नई नीति बनेगी :
प्रदेश में स्थित 37 हजार 420 वर्ग किलोमीटर बिगड़े वनों के विकास हेतु अब नई नीति बनेगी। पहले निजी निवेश से इसे सुधारने का प्रस्ताव था परन्तु इसे निरस्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर ग्राम सभाओं के माध्यम से बिगड़े वनों को सुधारा जायेगा जिसके लिये वन विभाग नई नीति बनायेगा। प्रदेश के 34 लाख 1 हजार 701.08 हेक्टेयर बिगड़े वनक्षेत्र में से 20 लाख 41 हजार 555.92 हेक्टेयर आरक्षित वन, 12 लाख 95 हजार 273.75 हेक्टेयर संरक्षित वन, 49 हजार 887.12 हेक्टेयर असीमांकित (नारंगी) वन एवं 14 हजार 984,29 हेक्टेयर भूस्वामी हक में दर्ज भूमि है। कुल 30 लाख 51 हजार 156.22 हेक्टेयर क्षेत्र संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को आवंटित कर प्रबंधन में है। बिगड़े वन क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले अधिकांश आरक्षित वन भूमि पर समाज के कोई अधिकार वर्तमान में अभिलिखित नहीं है।