डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस के साथ महंगाई ने कमर तोड़ने के साथ दिलो दिमाग तक हिला डाला है।

केंद्र सरकार भी क्या करे...मुफ्त में कोरोना वैक्सीन बांटना था इसलिए, वसूली करने के लिए मजबूर है।

अब राहत की खबर है? आम आदमी की परेशानियों को ताड़ते हुए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 

अरे न भैया... कोई दाम वाम कम नही होंगे बल्कि ऐसा कुछ ज़रूर होगा कि लोगो की तकलीफ तुरंत फुर्र हो सकेगी। सरकार ने वो तरीका सोचा है जिससे सांप भी भाग जाए और लाठी भी साबुत बच जाए। 

सोशल मीडिया से जुड़े बुद्धिजीवियों, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स, चाय पान की दुकानों पर खड़े होने वाले चिंतकों की महत्वपूर्ण सलाह पर एक योजना का ड्रॉफ्ट तैयार है। नवीन योजना को लेकर सरकार बड़ी उत्साहित है तो फुर्सत शास्त्री भी मान रहें हैं कि इसके परिणाम जबरदस्त होंगे।

केंद्र सरकार के भटकते सूत्रों के अनुसार विकास कार्यों के साथ मुफ्त वैक्सीन वितरण को बंद करना संभव नहीं है। ऐसे में महंगाई को छूट रहेगी कि, वो चाहे जितनी बढ़ा ले। लेकिन नवीन योजना के अनुसार महंगाई पर आधारित गानों को अब खूब बढ़ावा दिया जाएगा। ताकि आम लोग महंगाई वाले गाने बनाकर या गाकर अपनी भड़ास निकाल सकें। साथ ही मटककर मूल समस्या को थोड़ी देर के लिए भुला सकें।

सरकार योजना के प्रोत्साहन के लिए गाने बनाने वालों को ऊंचे दामों पर बैंक से कर्ज दिलवाने का काम करेगी। गाना भी बन जाएगा और बैंक की कमाई भी। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पूर्व में बनाए गए गानों को रीमिक्स करवाने का महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल किया गया है। 

जैसे 'सखी सैंया तो खूब कमात है, महंगाई डायन खाए जात है", "जो भी बचा था वो महंगाई मार गई" आदि आदि। और ज्यादा गानों को तलाशना हो तो सरकार के करीबियों की मोबाइल सेवा का उपयोग करते हुए यूट्यूब पर छान सकते हैं।

सरकार के मुखिया जल्द ही टीव्ही पर आठ बजे धमक कर इस योजना की घोषणा करेंगे। 

छुटभैये नेताओं की माने तो योजना के शुरू होने के बाद हांफते विपक्ष के हाथ से एक बड़ा मुद्दा जाना तय ही समझिए।

सोशल मीडिया पर महंगाई का मुद्दा टपकने पर दुबकने पर मजबूर होने वाले भक्त गणों के लिए भी यह योजना, जबर शक्ति के साथ नवीन ऊर्जा का संचार करेगी। साफ है कि भक्तगण पहले से ज्यादा मारक सिद्ध होंगे।

चलिए देर आए, दुरुस्त आए। सरकार ने बेशक देर से कदम उठाया लेकिन दमदार वाला। 

अब तक तो ठीक था लेकिन  उफ्फ़..अब अच्छे दिन आना तय समझिए । 

बाकी अपनी अपनी सेंकते रहो।