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सामान्यतः छरहरी कमर को उत्तम माने जाने के पीछे मुख्य कारण उसका आकर्षण है। पतली कमर शरीर को लोच प्रदान करके चाल की नजाकत बढ़ाती है। पतली तथा लोचदार कमर नारी सौंदर्य हेतु आवश्यक अंगों में प्रमुख रही है। 

प्राचीन कालीन मूर्तियों में भी स्त्री की कमर को पतले स्वरूप में दर्शाना इस तथ्य को उजागर करता है कि तब भी छरहरा कटिप्रदेश आदर्श माना जाता था। नारी सौंदर्य से संबंधित विभिन्न कालीन कविताओं में भी भिन्न-भिन्न कवियों ने नायिका के सौंदर्य का वर्णन करते समय पतली कमर का विशेष उल्लेख किया है। विदेशी साहित्य में भी ऐसा ही कुछ पढ़ने को मिलता है।

शारीरिक संरचना का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि स्त्रियों के कूल्हों की हड्डियां पुरुषों की अपेक्षा अधिक चौड़ी होती है। सामान्यतः यौवन के पदार्पण के साथ ही वक्षस्थल तथा नितंब जहां पुष्ट होकर सुडौलता प्राप्त करने लगते हैं, वहीं कटि क्षेत्र पतला होने लगता है।

कमर को आदर्श आकार देने के लिए आवश्यक है कि पेट तथा कमर पर अनावश्यक मांस न चढ़ने दिया जाए। इसके लिए नियमित व्यायाम करें तथा खानपान पर नियंत्रण रखें। विशेषकर चिकनाई से परहेज रखें। प्रसवोपरांत इस ओर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पड़ती है।

नियमित व्यायाम, प्रातः सायं भ्रमण, प्रसवोपरांत मालिश आदि उत्तम विधियां हैं। वैसे तैरना, रस्सी कूदना, नाचना, दौड़ना, चक्की पीसना, कुएं से पानी खींचना आदि भी इस दृष्टि से सहयोगी सिद्ध होते हैं। कुछ चिकित्सा शास्त्रियों का मत है कि भोजन के तुरंत बाद मूत्र-त्याग करने से कमर छरहरी होती है।

ऊंचा तकिया लगाकर सोना कमर के लिए हानिकारक है। बेढंगी चप्पल व सैंडल

पहनना, कमर में ढेरों चाबियां या अन्य आभूषण धारण करना, नाड़ा (कमरबंद) अधिक कसकर बांधना आदि आदतें भी ठीक नहीं हैं।

कमर के व्यायाम की कुछ सरल विधियां:

• जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हथेलियों को सिर के नीचे रख कर पैरों को जमीन से उठाए रखकर साइकल की तरह धीरे-धीरे चलाएं। ऐसा पच्चीस बार करें।

• लगभग दो मीटर लंबी छड़ी को दोनों कंधों पर रखें और दोनों हाथों को दोनों ओर ऐसे फैलाएं कि छड़ी हाथों में दबी रहे। अब छड़ी थामे रखकर धीरे-धीरे आगे-पीछे, दाएं-बाएं बारी-बारी से झुकें। ऐसा दस-पंद्रह बार करें।

दोनों पैरों में अधिक से अधिक अंतर रखते हुए खड़ी हो जाएं। दोनों हाथों को कमर पर ऐसे रखें कि अंगूठे आगे और उंगलियां पीछे रखें। अब सांस लेते हुए कमर को पीछे की ओर यथासंभव मोड़ने का प्रयास करें तथा कुछ देर वहां रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए कमर आगे की ओर अधिक से अधिक झुकाएं और कुछ देर वहां रुकें। नियमित अभ्यास से माथा आगे की ओर जमीन से काफी निकट स्पर्श करता प्रतीत होगा। यह व्यायाम दस बार करें।

• दोनों पैर मिलाकर सीधी खड़ी हों और दोनों हाथ कंधों के दोनों ओर 180 अंश के कोण पर फैलाएं। हथेलियां नीचे की ओर रखें। अब कमर बारी-बारी दाएं बाएं मोड़ते हुए हथेली से घुटने की साइड छूने का प्रयास करें, लेकिन दोनों हाथ सदैव उसी प्रकार 180 का कोण बनाए रखें।

• पैरों को थोड़ा फैलाकर सीधी खड़ी हो जाएं। आगे की ओर झुकते हुए दाएं हाथ से बाएं पैर का अंगूठा छुएं। ऐसा करते समय बायां हाथ ऊपर की ओर रखें । तत्पश्चात दूसरे हाथ से दूसरा अंगूठा छुएं। ऐसा पांच बार करें।

• जमीन पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। पैरों को आपस में मिलाकर ऊपर की ओर उठाएं तथा दूसरी ओर सिर को जमीन से ऊपर उठाते हुए दोनों हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ें। इस अवस्था में शरीर का सारा भार कमर पर केंद्रित हो जाएगा। ऐसा पांच बार करें।

• पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को नितंबों के नीचे इस प्रकार रखें कि हथेलियां जमीन की ओर रहे। अब धीरे-धीरे पैरों को मिलाकर ऊपर की ओर उठाएं तथा पंजों से माथा छूने का प्रयास करें (कुछ दिन अभ्यास करने से यह सफलता मिल जाएगी) और कुछ देर उसी अवस्था में रहकर पैरों को धीरे-धीरे पहले वाली स्थिति में वापस लाएं। ध्यान रहे प्रत्येक अवस्था में पैर घुटनों से मुड़ें नहीं। ऐसा पांच बार करें ।

• दोनों पांव मिलाते हुए सीधी खड़ी हो जाएं। हाथों को सिर के ऊपर सीधा ले जाकर दोनों हथेलियां मिला लें। अब कमर को दायीं ओर फिर बायीं ओर यथासंभव मोड़ने का प्रयास करें। ऐसा पांच बार करें।