लोन के साथ होम लोन इंश्योरेंस लेकर..

गृह ऋण के दबाव से अपनों को बचा लें:

होम लोन के साथ होम लोन इंश्योरेंस लेने से इस स्थिति से बचा जा सकता है। ये कितना फायदेमंद है और कैसे काम करता है, आइए समझते हैं।

होम लोन बीमा पर असमंजस:

जब आप होम लोन लेने के लिए बैंक जाते हैं, तो वो होम लोन बीमा लेने की सलाह देते हैं। ज्यादातर बैंकों और एनबीएफसी ने होम लोन बीमा को अनिवार्य कर दिया है। जबकि लोन बीमा अनिवार्य नहीं है। बीमा लेना है या नहीं यह लोन लेने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है। इसके लिए वो दबाव नहीं बना सकते। 

हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक यह बीमा एक अतिरिक्त सुरक्षा की तरह है। यदि ऋण धारक की मृत्यु हो जाती है तो बैंक घर की नीलामी नहीं करेगा। यह परिवार के लिए सुरक्षा का इंतजाम होता है। लोन बीमा लेने वाले व्यक्ति के साथ कोई आकस्मिक आपदा आने पर लोन राशि भुगतान नहीं करना होता। 

यदि व्यक्ति होम लोन के बराबर टर्म इंश्योरेंस कवर लेता है तो इंश्योरेंस कंपनी बीमाधारक को मृत्यु होने पर बीमे की राशि उसके परिजनों को दे देगी। इस पैसे से मृतक के परिजन खुद होम लोन का भुगतान कर सकते हैं।

होम लोन बीमा और टर्म इंश्योरेंस में प्रीमियम:

इसे समझते हैं। होम लोन बीमा की प्रीमियम एकमुश्त होती है जो लोन की राशि के साथ जोड़ दी जाती है। 50 लाख रुपए के कवर के लिए एकमुश्त प्रीमियम 25,000 रु. के लगभग चुकाना होता है। वहीं टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम अनुमानित समय अवधि के अनुसार 5000 से 7000 रु. सालाना तक होती है।

होम लोन इंश्योरेंस और होम इंश्योरेंस के बीच का अंतर…

कई बार लोग होम लोन इंश्योरेंस और होम इंश्योरेंस के बीच के अंतर को नहीं समझ पाते। होम इंश्योरेंस में घर और उसमें मौजूद सामानों की चोरी प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, तूफान, बाढ़ आदि से होने वाले नुकसानों को कवर करता है। वहीं होम लोन इंश्योरेंस पर खरीदने या बनवाने पर लिए गए कई को कवर करता है। 

टर्म इंश्योरेंस में कुछ विकल्प ऐसे भी है जहाँ अवधि पूर्ण होने पर हमें प्रीमियम राशि की हो सकती है। और अन्य विकल्प में इंश्योरेंस की बीमा राशि बढ़ती जाती है। यहां किसी प्रकार की आकस्मिक घटना होने पर परिवार के सदस्यों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता (लोन राशि भुगतान करने के बाद प्राप्त हो सकती है।