क्या कभी एलियन हमसे संपर्क करेंगे? क्या एलियन धरती पर आक्रमण करेंगे? क्या एलियन हम लोगों के दोस्त हैं? क्या एलियन ही हमें टेक्नॉलॉजी देते हैं?

आखिर क्या है सच:

मनुष्य वर्षों से एलियंस की तलाश कर रहा है। वैज्ञानिक पृथ्वी से रेडियो तरंगें भेजकर एलियंस से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक एलियंस ने किसी मानवीय संदेश का जवाब नहीं दिया है।

एलियंस मानव संदेशों का जवाब क्यों नहीं देते? वे कहां हैं वहाँ है या नहीं

"वे कहां हैं?"

यह सवाल हमेशा से मानव के मन में गूंजते रहे हैं, अनेक आर्टिकल्स फिल्मों और वीडियो के जरिए इन सवालों के जवाब देने की कोशिश की जाती है। लेकिन मानव का मन शांत नहीं होता क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से किसी ने एलियंस को नहीं देखा।

यह सवाल प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने 1950 में एक सहयोगी से पूछा था।

फर्मी का मानना ​​था कि ब्रह्मांड में अलग-अलग ग्रहों पर इंसानों की तरह और भी कई बुद्धिमान सभ्यताएं हैं। लेकिन फिर सवाल उठता है कि अगर वे हैं तो हम उनसे संवाद क्यों नहीं कर सकते? आखिर हैं कहां?

यह प्रश्न बहुत लोकप्रिय है और इस प्रश्न से जो विरोधाभास उत्पन्न होता है उसे 'फर्मी विरोधाभास' के नाम से जाना जाता है।

अकेले हमारी आकाशगंगा में कम से कम 100 अरब तारे हैं..

कुछ अध्ययनों के अनुसार, ब्रह्मांड में मनुष्यों के एकमात्र जीवित बुद्धिमान प्राणी होने की अधिक संभावना है। इसका मतलब है कि एलियंस का अस्तित्व लगभग असंभव है। लेकिन ऐसा नहीं है। एलियन का अस्तित्व अब साबित होता जा रहा है।

मनुष्य हमेशा अन्य ग्रहों पर जीवन के बारे में उत्सुक रहा है। एलियंस इस जिज्ञासा का रहस्यमय चरित्र हैं। दो वैज्ञानिकों की थ्योरी की मानें तो एलियंस की हकीकत और करीब नजर आती है। 

पिछले साल दिसंबर में, इजरायली अंतरिक्ष यात्री हाम ईशाद ने संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल को यह कहकर चौंका दिया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने एलियंस के साथ एक समझौता किया था। ईशेड के मुताबिक, एलियंस के पास मंगल ग्रह पर ​​रिसर्च स्टेशन है। 

दूसरी ओर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवी लोएब ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि पृथ्वी पर उल्का पिंड या क्षुद्रग्रह का आना कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि एलियंस द्वारा वातावरण में फेंका गया मलबा है।

स्टैंटन फ्रीडमैन एक परमाणु वैज्ञानिक थे जिनका मई 2019 में निधन हो गया। उन्होंने अमेरिका के मशहूर रोसवेल यूएफओ क्रैश की जांच की। वह इस बात पर अड़े थे कि एलियंस हमारे बीच हैं। उन्होंने ने कहा, इस बात के बहुत सारे सबूत हैं कि एलियंस पृथ्वी पर आए हैं और इंसानों के साथ रह रहे हैं।

रूसी राजनेता किरसन इलुज़िनोव ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि 18 सितंबर 1997 को एलियंस उनके अपार्टमेंट में उनसे मिलने आए थे। बाद में  एलियंस ने उन्हें अगवा कर लिया था। 

यह कहानी दो कारणों से विश्वसनीय मानी जाती है। एक ओर, इलुज़िनोव के ड्राइवर, मंत्री और सहायक ने पुष्टि की कि वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गये थे। दूसरा कारण यह है कि रूसी सरकार ऐसा मानती है। 

रूस में भी हैं एलियंस:

रूस के पूर्व प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने बार-बार एलियंस की मौजूदगी की बात कही। एक बार एक रिपोर्टर से बात करते हुए उनके मुंह से निकला कि एलियंस इंसानों के बीच रहते हैं और उनके साथ काम करते हैं।

एलियंस परमाणु बम के बारे में चिंतित हैं:

कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री पॉल हेलर ने दावा किया कि एलियंस धरती पर आते रहते हैं। उनके मुताबिक पिछले कुछ सालों में यहां उनकी गतिविधियां बढ़ी हैं। वास्तव में, वे पृथ्वी पर परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा को लेकर बहुत चिंतित हैं।

क्या अमेरिका एलियंस की चपेट में है?:

एडवर्ड स्नोडेन ने अमेरिका को लेकर कुछ बेहद सनसनीखेज दावे किए हैं। कहा जाता है कि एडवर्ड स्नोडेन ने गोपनीय जानकारी चुराई थी जब वह सीआईए कर्मचारी थे। स्नोडेन द्वारा लीक की गई जानकारी से संकेत मिलता है कि अमेरिका को "टॉल व्हाइट" नामक एलियंस से निर्देश मिल रहे हैं। 

लीक्स के अनुसार, यह एलियन की वही प्रजाति है जिसके बारे में दावा किया जाता है कि उसने प्रथम विश्व युद्ध से पहले नाजियों को सत्ता में लाया था। ऐसा दावा किया जाता है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद उन एलियंस ने अमेरिका पर नियंत्रण करना शुरू कर दिया था।

मंगल एकमात्र ऐसा ग्रह नहीं है जिसमें अलौकिक जीवन (अर्थात किसी अन्य ग्रह पर जीवन) की क्षमता है। हमारे सौरमंडल में कई ऐसी जगहें हैं जो रहने लायक हैं। 

अमेरिकन अंतरिक्ष यात्री व लेखक कार्ल सागन ने लिखा था कि ब्रह्मांड बहुत बड़ा है, यह अनंत है। अगर इस ब्रह्मांड में सिर्फ हम हैं तो यह सोचना नादानी है। 

जलते हुए उल्का पिंड के कई टुकड़े जब धरती पर गिरे तो उनमें से लगभग 2 इंच चौड़ा हिस्सा श्रीलंका के शहर पोलोन्नरुवा में गिरा. जब गांव वालों ने उस टुकड़े को देखा उसमें तब भी धुआं निकल रहा था.

ब्रिटिश प्रयोगशाला के अंदर जब इस टुकड़े का परीक्षण किया गया तब उसमें जीवाश्म के  होने की बात सामने आई. इतना ही नहीं परीक्षण में यह भी सामने आया कि आज से लाखों साल पहले डायनासोर के जीवाश्मों में से जो सूक्ष्म जीव मिले थे वैसे ही सूक्ष्म जीव उल्कापिंड के टुकड़े के ऊपर पाए गए.

एक और स्टडी सामने आई है। कैम्ब्रिज एस्ट्रोनॉमर्स की। उन्होंने कहा है कि आने वाले तीन सालों में एलियन की दुनिया की खोज कर ली जाएगी। एलियन की जिंदगी के बारे में पता लगाया जा सकेगा।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने हमारे सोलर सिस्टम के भीतर तथाकथित हाइजीन प्लैनेट्स पर करीब से नजर डाली। उन्हें शक था कि एलियन की जिंदगी के लिए ये सबसे सही जगह हो सकती है। 'मिनी-नेपच्यून' K2-18b पृथ्वी से बहुत बड़ा है, लेकिन यह ओशियन्स से ढका हुआ है। यहां जिंदा रहने के लिए पर्याप्त गर्मी और हाइड्रोजन है।

लेकिन मीथेन और अमोनिया के हेल्दी लेवल मिलने के बाद वैज्ञानिकों को विश्वास है कि K2-18b में ब्रह्मांड के अनोखे रहस्य हो सकते हैं।