चुनाव क्षेत्रों में खाद डालने के बाद अब किसानों के संकट पर फोकस...

भोपाल: मप्र में किसानों को खाद हासिल करने के लिये हो रही परेशानी तथा आये दिन हो रहे बवाल पर अब सरकार का फोकस बढ़ सका है। बीते एक पखवाड़े से उपचुनाव के लिये प्रचार की सरगर्मी शांत होने के बाद आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस मामले में अफसरों से फीडबैक ले रहे हैं। वहीं हालातों का संभालने के लिये अब जिलों में वरिष्ठ अफसरों को खास प्रभार सौंपे जाने की भी तैयारी चल रही है। इससे पहले शिवराज ने सभी कलेक्टरों को जिम्मा दिया था कि वे निगरानी करें और खाद वितरण व व्यवस्था पर नजर रखें।

मंत्री-विधायक भी मोर्चे पर जाएंगे: 

कल उपचुनाव का प्रचार व तीस अक्टूबर को मतदान के बाद चुनाव वाले जिलों में भी प्रभारी मंत्रियों और विधायकों को मैदानी स्तर पर सक्रिय किया जाएगा। सूत्रों का दावा है कि यूरिया और डीएपी की आपूर्ति लगातार हो रही है। प्रतिदिन तीन-चार रैक खाद आ रही है। 3 लाख 18 हजार 263 टन यूरिया प्रदेश में उपलब्ध है, जो बोवनी के कम से कम 18 दिन बाद किसानों को लगना है।

दूसरी ओर चंबल से लेकर गुना अशोकनगर व सिरोंज से लेकर कई जिलों में खाद संकट गहराया हुआ है। सूत्रों का कहना है कि इस बार मप्र को पिछले वर्ष की तुलना में करीब बीस फीसद ज्यादा खाद आवंटन हुआ है। बावजूद खाद संकट सामने आने से कई सवाल खड़े होने लगे हैं।

आखिर कहां गया खाद:

सरकार का दावा है कि खाद का संकट नहीं है, लेकिन ज्यादा आवंटन के बाद भी यह खाद किसानों को क्यों नहीं मिल रहा है, यह बात रहस्य बन गई है। सूत्रों का मानना है कि कालाबाजारी के लिये इसका संग्रहण तथा आंकड़ों की बाजीगरी के चलते संकट गहरा रहा है। पहले से खाद की जरूरत का आकलन नहीं होना भी इसकी वजह है। कुछ अफसरों का दबी जुबान कहना है कि इस बार कई संभागों के किसानों ने गेहूं की बजाए सरसों की फसल लेने की ओर मुड़े हैं, इसलिये खाद की मांग बढ़ी है। 

उल्लेखनीय है कि रबी फसलों की बोवनी तेज होने के साथ डीएपी और यूरिया की जबरदस्त मांग व किल्लत देखी गई है। कहा जाता है कि अक्टूबर की मांग के अनुसार खाद तो उपलब्ध करा दी गई है पर आंतरिक वितरण व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। लिहाजा विक्रय केंद्रों पर भीड़ लगने और अव्यवस्था फैलाने की घटनाएं हो रही है। इसके चलते वरिष्ठ अधिकारियों को जिलो की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की गई है ताकि वे प्रतिदिन समीक्षा कर सकेंगे।