पहले तीन दिन में आती थी मावे की जांच रिपोर्ट, अब महीने भर में भी नहीं आ रही..
भोपाल: तकनीकी उपयोग को किसी भी काम के जल्द होने की गारंटी बताया जाता है। लेकिन खाद्य विभाग में इसके उलट रवैया सामने आ रहा है। इससे अधिकारियों की मंशा और कर्मचारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। पहले मावे की जांच रिपोर्ट तीन दिन में आ जाती थी, जो अब महीने भर में भी नहीं आ पाती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा त्योहारी सीजन में नकली मावा जब्त करने से लेकर तरह-तरह की चीजों के सैंपल लिए जाते हैं, लेकिन जांच की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने की वजह से सैंपल सड़ते रहते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों के लीगल नमूनों की जांच रिपोर्ट 14 दिन के भीतर आ जानी चाहिए, लेकिन हालत यह है कि एक से दो महीने बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आ रही है।
भोपाल शहर में शुक्रवार को भी तीन क्विंटल मावा जब्त किया गया है लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट आने में कम से कम 20 दिन लग जाएंगे। दीपावली के त्योहार को देखते हुए यह मावा भोपाल में मिठाई और अन्य उत्पाद बनाने के लिए लाया गया था।
• दीपावली पर्व जैसे मौकों पर बढ़ जाती है मावा की खपत, नकली मावा बाजार में खपने का बना रहता है अंदेशा |
आज से करीब 10 साल पहले खाद्य एवं औषधि प्रशासन में ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी कि मावा जब्त करने के 3 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट आ जाती थी। इसका फायदा यह होता था कि मावा खराब होने पर व्यापारियों के सामने ही नष्ट कर दिया जाता था। शुद्ध होने पर व्यापारी को वापस कर दिया जाता था और व्यापारी को नुकसान नहीं होता था। साथ ही शहर में मावा की कमी नहीं होती थी।
अब हर त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सैंपल तो ले लेते हैं, लेकिन समय पर जांच नहीं हो पाती है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने खानपान की चीजों के सैंपल की जांच के लिए इंदौर की एक निजी लैब से अनुबंध किया है। इस लैब से प्रति सैंपल 3500 रुपए में जांच कराई जाती है। प्रदेश भर में एक हफ्ते में लिए जाने वाले सैंपल निजी लैब में भेजे जाते हैं, जबकि अगले एक हफ्ते में लिए गए सैंपल भोपाल स्थित प्रदेश की एकमात्र सरकारी लैब में जांचे जाते हैं।