भारतीय सरजमीं पर होने वाली टेस्ट सीरीज में ज्यादातर गेंदबाजों का ही बोलबाला रहता है। ऐसा ही कुछ नजारा टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में ग्रीन पार्क पर देखने को मिला। जब दोनों ही टीमों के गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को काफी हद तक काबू में कर लिया, लेकिन बतौर बल्लेबाज उतरे इन गेंदबाजों को जीतने में कामयाब नही हो सके। दरअसल टीम इंडिया को फिरकी की मददगार पिच पर आखिरी दिन जीत के लिए 9 विकेट निकालने की जरूरत थी, लेकिन मंजिल के काफी करीब आने के बावजूद जीत उसके हाथों से फिसल गई नाईट वॉचमैन समरवेल की जुझारू पारी के बाद रचिन रविंद्र और एजाज पटेल ने 52 गेंदों तक विकेट पर टिककर टीम इंडिया के जबड़े से जीत छीनकर कानपुर टेस्ट मैच को ड्रॉ पर खत्म करवा दिया।
टेस्ट चैंपियनशिप के तहत खेला जाने वाला यह मैच टीम इंडिया के लिए कई मायनों में अहम है। कोहली, रोहित, राहुल, बुमराह और शमी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के बिना टीम इंडिया ने यह मैच खेला, हालांकि घरेलू मैदानों की असल ताकत यानी फिरकी के सभी दिग्गज ग्रीन पार्क के मैदान में थे। और इन्ही फिरकी की वजह से बैकफुट पर जाने के बावजूद टीम ने शानदार वापसी की। श्रेयस अय्यर के शानदार डेब्यू और टीम इंडिया की फिरकी तिकड़ी (गेंद व बल्ले) की बदौलत मैच में वापसी करते हुए मैच को आखिरी ओवर तक रोमांचक बनाए रखा।भले ही कानपुर में खेला गया पहला मुकाबला ड्रॉ हो गया है लेकिन सच तो यह है कि टीम इंडिया ने जीत का सुनहरा मौका हाथ से गंवा दिया है।
भले ही टीम इंडिया के फिरकी ने पूरे मैच में अपनी पकड़ बेहद मजबूत रखी, लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि तेज गेंदबाज इस मैच में अपना योगदान देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। अगर हम इस मैच में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन पर डालें तो वह टीम इंडिया की दोनों पारियों के 17में से 14 विकेट कर असरदार रहे। वहीं टीम इंडिया के तेज गेंदबाज उसी विकेट पर ची टीम के 19 में से केवल 2 विकेट हासिल कर सके, दोनों ही कट उमेश यादव के खाते में गये। यह बात वाकई समझ से परे है कि बनी गति और लेट स्विंग को ऑस्ट्रेलिया में साबित कर चुके सिराज नरहेज कर इशांत शर्मा को मौका क्यों दिया गया है।
अगर हम दोनों टीमों के तेज गेंदबाजों की तुलना करें तो एक ओर कीवी गेंदबाज लगातार शार्ट पिच गेंदों पर भी टीम इंडिया के बाजों को परेशान कर विकेट हासिल करने में सफल रहे वहीं टीम या के तेज गेंदबाज यदाकदा ही ऐसा करते दिखे बावजूद इसके के आखिरी दिन कप्तान रहाणे द्वारा लगातार उमेश यादव का प्रयोग टीम इंडिया के लिए काफी हद तक फायदेमंद साबित नहीं नाउमेश यादव पर उनके भरोसे की वजह कीवी कप्तान की वह जना भी रही होगी, जिसके तहत वो लगातार एक छोर से तेज जबकि दूसरे छोर से फिरकी पर दांव खेलते रहे।
इसकी खास वजह यह भी थी कि कीवी टीम के फिरकी दोयम दर्जे के भी थे। अब अगर हम रोमांचक दिनों तक चले इस टेस्ट मैच पर गौर करें, तो फिर एक बात और लगातार सुर्खियों में रही, वह घरेलू मैदानी अंपायरों के निर्णय रहे। वैसे तो आईसीसी के मैचों में तटस्थ अंपायरों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन कोरोना काल की वजह से यह भूमिका आईसीसी पेनल के ही घरेलू निर्णायकों (नितिन मेनन, वीरेंद्र शर्मा) पर थी। इस बात में कोई शक नहीं कि इन दोनों ही अंपायरों ने पूरे मैच में लगातार गलत निर्णय देकर उनकी काबलियत ओर नजरिये पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
यह बात इसलिए कही जा रही है कि पूरे मैच में लगभग 8 मौकों पर उनका फैसला रिव्यू की वजह से पलटा गया। वहीं कई बार रिव्यू की चूक भी खिलाड़ी के लिये नुकसान दायक साबित हुई। मतलब साफ है कि कानपुर के टेस्ट मैच में बेहद निम्न स्तर की ही अंपायरिंग देखने को मिली है।