जिस तरह की बयानबाजी आये दिन की जा रही है, यह भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खराब है। आने वाले समय में हो सकता है कि इसके काफी खतरनाक परिणाम देखने भी देखने को मिलें कप्तान विराट कोहली की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह बात बिल्कुल साफ हो गयी है कि बयानबाजी की जंग अब क्रिकेट के दो दिग्गज आक्रामक कप्तानों के बीच छिड़ गयी है। 

वैसे इस जुबानी जंग का आगाज भी बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने ही किया था। दरअसल कप्तान कोहली को वनडे की कप्तानी हटाने की वजह बताने के लिए चयन समिति के अध्यक्ष को दरकिनार करते हुए गांगुली ने तमाम वो वजहें बताई, जिसके कारण उनको इस फॉर्मेट की कप्तानी से हटाया गया। 

वैसे अगर यह घोषणा चयन समिति के अध्यक्ष चेतन शर्मा के द्वारा की जाती, तो फिर शायद हालात इतने नाजुक नहीं बनते। सच तो यह है कि गांगुली और कोहली के बीच इस जंग की शुरुआत अनिल कुंबले के हेड कोच के पद छोड़ने से ही चली आ रही है। शायद इसी वजह से सौरभ गांगुली ने अपने आक्रामक अंदाज में यह बयानबाजी करके कप्तान कोहली को यह एहसास दिलाया कि वह अब भारतीय क्रिकेट के सर्वोपरि हैं। 

गांगुली के उस विवादित बयानबाजी के बाद से आये दिन तरह तरह की बातें निकल कर आ रही थीं। जिसमें सबसे अहम यह बात कही जा रही थी कि विराट कोहली और रोहित शर्मा एक दूसरे की कप्तानी को नकार रहे हैं। 

इसी वजह से दोनों एक दूसरे की कप्तानी में खेलते हुए मैदान में नहीं देखे जायेंगे वैसे सच तो यह है कि जब भी ये दोनों दिग्गज मैदान में साथ खेलते हैं तो फिर दोनों के बीच गजब का तालमेल हमेशा देखा जाता रहा है। 

मतलब साफ है कि दोनों खिलाड़ियों के बीच अनबन की खबरें भी महज अफवाह कही जा सकती है। लेकिन जब हालात सही न हो तो बात का बतंग? कैसे बनाया जाता है यह पिछले कुछ दिनों से भारतीय क्रिकेट के घटनाक्रम को देख के समझा जा सकता है। 

वैसे भी बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली के विवादित से बयान के बावजूद कप्तान कोहली को लेकर जो भी खबरें निकल कर आ रही थी, वह वनडे की टीम घोषित पर खत्म हो सकती थी। लेकिन यकायक खेल मंत्री अनुराग ठाकुर का इस बयानबाजी में उतारना और फिर विराट कोहली की प्रेस कॉन्फ्रेंस लेना दोनों ने ही क्रिकेट के खेल में नयी जंग छेड दी है। 

ऐसा माना जा रहा है, कि कप्तान कोहली को वनडे के लिए अपनी उपलब्धता और रोहित शर्मा की कप्तानी में खेलने को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करने का दवाब था। दोनों ही बातें कप्तान कोहली ने बेहद सुलझे हुए अंदाज में बोल कर क्रिकेट के प्रति अपना बेहद सकारात्मक नजरिया भी दिखा दिया लेकिन उसके बाद उन्होंने जो कुछ कहा उससे विवाद सुलझने की बजाय और उलझ के रह गया। 

दरअसल उनका यह बयान सौरभ गांगुली के उस बयान के बिल्कुल उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि कप्तान कोहली को टी20 कप्तान बने रहने के लिए बोला गया था। लेकिन कोहली नहीं माने जिस वजह से उनको वनडे की कप्तानी से हटाना पड़ा? क्योंकि सफेद गेंद फॉर्मेट में दो कप्तान रखना काफी मुश्किल था। 

मतलब साफ है कि कप्तान विराट कोहली और सौरभ गांगुली में से किसी एक की बयानबाजी गलत है। वैसे अगर हम सौरभ गांगुली की मनोभावना और उनके इतिहास पर गौर करें तो यह हमेशा से ही बेहद आक्रामक रवैये की वजह से जाने जाते रहे हैं। 

फिर चाहे उनका लॉड्स के मैदान पर उनका कमीज उतारने का वह अंदाज हो या फिर कोच ग्रेग चैपल को हटाने के लिए चलायी गयी उनकी आक्रामक मुहिम हो दोनों ही मौकों पर गांगुली ने सफलता हासिल की थी। 

हालांकि उनकी वह जंग विदेशी खिलाड़ियों के साथ थी।अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली भारतीय क्रिकेट की बेहतरी के लिए कौन सा रुख अपनाते है।