बाकी है गैस त्रासदी के खतरे, लापरवाह निजाम...

भोपाल: मानव जाति के लिए भोपाल में 37 साल पहले हुआ गैस कांड अभी भी खतरा बना हुआ है। जिस यूनियन कार्बाइड कारखाना से गैस का रिसाव हुआ था वहां पड़े जहरीले कचरे का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले सालों तक भूजल स्त्रोतों को यह प्रदूषित कर देगा। कारखाना के आसपास कई कॉलोनियो तक इसका दायरा बढ़ जाएगा।

गैस पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए चार गैस पीड़ित संगठनों के प्रमुखों ने सरकार से मानव जाति को संभावित खतरे से बचाने के लिए सवाल करना शुरू कर दिए हैं। इसकी शुरुआत मंगलवार से हो गई है। गैस पीड़ितों के पक्ष में संगठनों ने पहले सवाल में पूछा है कि मृतकों की संख्या अलग-अलग क्या बताई जा रही है। इसी तरह के और 36 सवाल किए जाएंगे। इन सवालों का मकसद गैस पीड़ितों को न्याय दिलाना होगा।

गैस पीडित संगठन की रचना ढींगरा ने बताया कि गैस कांड को इतने साल हो चुके हैं। अब तक पीड़ितों को आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास नहीं हुआ है। गैस पीड़ितों अपने हाल पर जीवन जी रहे हैं। जिस कारखाना से गैस का रिसाव हुआ था उसके आसपास कई वर्ग मीटर तक जमीन और भूजल प्रभावित हुआ है और इसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है। जिसके प्रभाव में गैस पीड़ित आ रहे हैं। 

यहीं हाल रहा तो 37 साल बाद भी प्रभावितों का जीवन और मुश्किल हो जाएगा। आने वाली पीया भी कहीं न कहीं प्रभावित होंगी। आम जीवन का नुकसान होगा। इस दृष्टि से आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास जरूरी है जिसकी सरकारों को चिंता नहीं है। समय-समय पर प्रत्येक सरकारें आई और गई लेकिन किसी ने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया।

रचना ढींगरा ने आरोप लगाए कि इतने सालों में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जहरीले कचरे को नहीं हटवा पाई है। हर बारिश में इसका दायरा बढ़ता ही गया है। आने वाले समय में यही कचरा पूरे भू-जल सिस्टम के लिए सिर दर्द बन जाएगा। दुनिया की बड़ी त्रासदी से हुए नुकसान के बावजूद सरकार कचरे को अनदेखा कर रही है। जबकि इस कचरे के कारखाने को मालिक कंपनी अच्छे से नष्ट कर सकती थी उन्हें पूरा स्ट्रक्चर व विधि पता है कि कौन सा रसायन किस विधि से बना है और उसके अपशिष्ट को कैसे नष्ट किया जा सकता है। 

सरकारों को संबंधित कंपनी से हो जहरीला कचरा, रसायन व उपशिष्ठों को नष्ट करवाया था जो कि नहीं करवाया जा रहा है। जबरन यहां-वहां राशि खर्च करने की तैयारी की जा रही है।

सभी सरकारों ने अनदेखा किया..

यह अनदेखी केवल गैस पीड़ितों और कारखाना के आसपास की रहवासी बस्तियों के रहवासियों को ही महंगी नहीं पड़ रही है बल्कि पूरे भोपालवासी इससे कहीं न कहीं प्रभावित हो रहे हैं। गैस पीड़ितों संगठन की राशिदा बी ने पत्रकारों से कहा कि यह विषय मानव जाति के अभिस्तत्व से जुड़ा है जिसे सभी सरकारों ने अनदेखा किया है। 

अपनों को गंवाने वालों को नाममात्र का मुआवजा दिया गया है जहां कि कंपनी थी वहां इस तरह के हादसों पर करोड़ों रुपये दिए जाते थे, हमारें यहां 50 हजार और 10 लाख रुपये दिए गए। यह राशि भी सभी पात्र पीड़ितों को नहीं दी गई। गैस पीड़ितों संगठनों के प्रमुखों का कहना है कि गैस कांड को 37 साल तो हो गए लेकिन इसके प्रभाव आज भी जिंदा है। इसे यह कहकर भूला नहीं सकते कि गैस कांड तो पुराना हो गया है।