खैर, जानकारी अपनी जगह, लेकिन सोशल मीडिया से तस्वीरें, फ़िल्में और अन्य अश्लील सामग्री इतने खुले रूप से उपलब्ध हो गयी है, कि कभी किसीने सोचा भी नहीं था. मनुष्य का मन गलत बातों की तरह स्वाभाविक रूप से जाता है. अधिकतर लोग इन्टरनेट का उपयोग सिर्फ अश्लील चीजें देखने के लिए करते हैं. एडल्ट लोगों का मन-मस्तिष्क को इससे मनोग्रस्त होकर पतन की ओर जा ही रहा है, लेकिन बच्चों के लिए यह बहुत घातक सिद्ध हो रहा है.
 
बहुत कम उम्र के बच्चों के हाथों में एंड्राइड फोन और इन्टरनेट की सुविधा मौजूद है. बेशक, वे इसके माध्यम से ज्ञान भी अर्जित कर रहे हैं. लेकिन इसका दूसरा प्रभाव यह है, कि वे उन गतिविधियों में संलग्न हो रहे हैं, जिनमें इस उम्र में संलग्न होना पूरी तरह विनाशक है.
 
आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक खबर छपी है, जिसके मुताबिक़ बच्चों के साथ बलात्कार, छेड़छाड़ सहित अनेक प्रकार के अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुयी  है. खबर में भोपाल का संदर्भ दिया गया है, लेकिन यह बात सभी शहरों में समान रूप से लागू होती है. अपराध के आंकड़ों के विश्लेषण पर पाया गया है, कि बच्चों के साथ बलात्कार की घटनाओं में अधिकतर मामलों में परिवार का कोई करीबी व्यक्ति ही अपराधी होता है. यहाँ तक, कि ऐसे अपराधों के लिए मौत की सज़ा का भी लोगों में डर नहीं रहता. पुरानी कहावत है, कि “कामातुर व्यक्ति को न डर होता है और न लाज”.
 
बच्चों के अधिकारों के संरक्षण से जुड़े वालंटियर्स  का कहना है, कि कविड-19 के कारण यह स्थिति और अधिक बिगड़ी है. लोगों के घरों में रहने से उन्होंने इन्टरनेट का अधिक उपयोग किया.इसमें बच्चे भी पीछे नहीं रहे.उनके बहट से ऑनलाइन फ्रेंड्स बन गये, जिनकी वास्तविकता वे नहीं जानते. ऐसे चालाक लोग कम उम्र की लड़कियों को अपने जाल में फाँसकर उनके साथ अश्लील काम करते हैं. बच्चियां बहुत भोली और भावुक होने के कारण इस पूरी साजिश को समझ नहीं पातीं और उनकी शिकार हो जाती हैं. चाइल्ड हेल्पलाइन में बड़ी संख्या में माताएँ इस तरह से भ्रमित अपनी बच्चियों को काउन्सलिंग के लिए लेकर आ रही हैं.
 
विशेषज्ञों का मानना है, कि माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए. उनकी ब्रोउजिंग हिस्ट्री को समय-समय पर देखते रहना चाहिए, ताकि यह पता चल सके, कि वह किन लोगों के संपर्क में है और किन गतिविधियों को फॉलो कर रहा है. बच्चों के साथ समय-समय पर उपयुक्त अवसर देखकर इस विषय में बातचीत भी करते रहना चाहिए. उनके प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान किया जाना चाहिए. बच्चे के व्यवहार में यदि थोडा-सा भी बद्लाव आये, तो उसे समझने की कोशिश कर उसकी तह तक पहुंचना चाहिए.
 
इसके अलावा, परिवार के करीबी लोगों पर आँख मींच कर भरोसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. पहले का ज़माना और था, जब नैतिकता का स्तर बहुत ऊँचा था और संबंधों में बहुत पवित्रता थी. लोग मुँहबोली बहन के साथ भी सगी बहन के साथ रिश्ता भी सगी बहन की तरह निभाते थे. लेकिन आज परिस्थितियां वैसी नहीं रह  गयी हैं. इसमें भी इन्टरनेट और उसपर उपलब्ध अश्लील सामग्री का बहुत बड़ा हाथ है.
 
आज तो स्थिति यह हो गयी है, कि बच्चियों की तो छोड़िये, बच्चे तक सुरक्षित नहीं हैं. भले ही सभी लोगों पर शक भले ही न करें, लेकिन किसी पर भी पूरा भरोसा नहीं करें. कभी भी कोई धोखा दे सकता है. यदि कोई बुरा आदमी नहीं भी है, तो माहौल ऐसा बन गया है,कि वह उसका शिकार हो ही जाता है.
 
बच्चियों को बहुत कम उम्र से ही “गुड टच और बेड टच” के विषय में समझाते रहना चाहिए. उन्हें बताया जाना चाहिए, कि किस प्रकार किसी प्रलोभन या बहकावे में आकर उनका जीवन बर्बाद हो सकता है. घर में भी ऐसा वातावरण बनाकर रखना चाहिए, कि बच्चे अच्छी किताबें और साहित्य पढ़ने की ओर प्रेरित हों. कुछ ऎसी कहानियों के माध्यम से भी बच्चों को शिक्षित किया जाना चाहिए, जिनसे चरित्र में दृढ़ता आती हो.
 
लिहाजा,आज हर माता-पिता का कर्तव्य है, कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर तो पूरी नज़र रखें ही,साथ ही उनके दोस्तों और ट्यूटर्स आदि के सम्बन्ध में पूरी जानकारी रखें. ऐसा करके समाज में चाइल्ड एब्यूज की बुराई को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है.