कमलनाथ ने कहा कि हमने तो घोषित आपातकाल लगाया था लेकिन अब “अघोषित” का दौर है|  केंद्र और राज्य मीडिया को अघोषित रूप से कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं|  कमलनाथ ने इशारों इशारों में केंद्र की एनडीए और मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार पर निशाना साधा|  कमलनाथ ने कहा कि  राज्य और केंद्र सरकारें विज्ञापन के दम पर मीडिया को कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं|  मीडिया समूह की आय का ज्यादातर हिस्सा सरकार के विज्ञापन से प्राप्त होता है और इसी वजह से मीडिया सरकार के दबाव में काम करती है|

कमलनाथ की यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को रास नहीं आई|  उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऐसे कार्यक्रमों पर राजनीतिक बयानबाजी करने पर आपत्ति जताई|  शिवराज ने कहा कि वह ना तो “घोषित” के पक्ष में है ना ही “अघोषित” के|  उन्होंने कांग्रेस की सरकार पर मीडिया रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लेने की बात भी कही| 

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दरअसल शिवराज सिंह चौहान देश के जाने माने पत्रकार राजकुमार केसवानी को याद कर रहे थे|  उन्होंने कहा कि किस तरह से केसवानी जी ने भोपाल गैस कांड से पहले ही हादसे का अंदेशा व्यक्त किया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उनकी रिपोर्ट को तरजीह नहीं दी और इतना बड़ा हादसा हो गया| जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई|

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है|  उन्होंने साफ तौर पर तीसरी लहर की भविष्यवाणी की|  उन्होंने कहा कि  ओमेक्रोन मध्यप्रदेश में आ चुका है और तीसरी लहर आने वाली है| ऐसे में मीडिया को लोगों को जागरूक करने के लिए ज्यादा से ज्यादा खबरें प्रकाशित करनी चाहिए|  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ऐसे मौके नहीं आने चाहिए कि पत्रकारों के निधन की याद में ऐसी किताबें प्रकाशित करनी पड़े|  मुख्यमंत्री ने जानेमाने पत्रकार स्वर्गीय शिव अनुराग पटैरिया के निधन का जिक्र भी किया|  उन्होंने कहा कि पटेरिया जी  चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया थे|  ऐसे जीवंत पत्रकारों का इस दुनिया से विदा हो जाना  हृदय विदारक है|  किताब ग्वालियर के पत्रकार देव श्रीमाली ने लिखी है|  किताब के विमोचन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने पक्ष और विपक्ष से मिलकर पत्रकारों के हित में जरूरी कदम उठाने की अपील की|  

उन्होंने कहा कि सरकार को हर हाल में ऐसे पत्रकारों की चिंता करनी होगी, जो अपनी ड्यूटी अपनी जान की प्रवाह किये बिना निभाते हैं|  जो पत्रकार इस दुनिया से चले गए उनके परिवार की चिंता भी सरकार को करनी चाहिए|

कार्यक्रम में  उन पत्रकारों के परिजन भी मौजूद थे जो इस दुनिया से कोरोनावायरस के चलते विदा हो गये|