बिरसा मुंडा की जयंती पर आदिवासी गौरव दिवस (15 नवंबर) पर मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियां आदिवासी वोट बैंक को आकर्षित करने की कोशिश में हैं। आदिवासी गौरव दिवस पर भोपाल में आमसभा का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे। वहीं अब जबलपुर में कांग्रेस ने आदिवासी अधिवेशन को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ मौजूद रहेंगे।

राज्य सरकार ने आदिवासी गौरव दिवस धूमधाम से मनाने की तैयारी की है। इसके लिए राज्य में 15 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। पहले यह स्वैच्छिक अवकाश था। सरकार ने राज्य भर में कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ढाई लाख आदिवासियों को राजधानी लाने की तैयारी कर ली गई है।

2023 के चुनाव की तैयारी
आदिवासी महासम्मेलन को 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारियों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश में आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग के लिए 47 सीटें हैं। इसके अलावा 31 सामान्य श्रेणी की सीटें हैं जहां आदिवासी मतदाता निर्णायक हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला तो कहीं न कहीं आदिवासी सीटों पर पकड़ ढीली होने की वजह रही। 2013 में 47 आरक्षित सीटों में से बीजेपी के पास 32 सीटें थीं, जो 2018 में घटकर 16 रह गईं।

आदिवासी योजनाओं की घोषणा
प्रधानमंत्री आदिवासी गौरव दिवस पर भोपाल के जंबुरी मैदान में मुख्य समारोह में हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री इस बीच आदिवासियों के लिए बड़े ऐलान कर सकते हैं। साथ ही आदिवासी समुदाय के लिए लागू की गई योजनाओं को दोहराया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठन लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उसका भी फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (JAYS) जैसे संगठनों ने भी पिछले चुनावों में भाजपा को परेशान किया था। बीजेपी इस आयोजन के जरिए अपना प्रभाव कम करने की कोशिश करेगी।

जबलपुर में कांग्रेस आदिवासी सम्मेलन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि कांग्रेस 15 नवंबर को जबलपुर में आदिवासी अधिवेशन करेगी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मौजूद रहेंगे। जबलपुर में आदिवासी सम्मेलन आयोजित कर कांग्रेस आदिवासी समुदाय में अपनी ताकत दिखाना चाहती है। सम्मेलन की जिम्मेदारी तरुण भनोट को सौंपी गई है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी क्यों महत्वपूर्ण हैं?
2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 43 आदिवासी समूह हैं। राज्य की जनजातीय आबादी 2 करोड़ से अधिक है, जो 230 विधानसभा सीटों में से 84 को प्रभावित करती है। भील-भिलाला की आबादी सबसे ज्यादा 60 लाख है, जबकि गोंड की आबादी करीब 50 लाख है। कोयला 11 लाख का है, जबकि कोरकू व सहरिया करीब छह लाख का है। करीब 10 साल बाद इन आंकड़ों में भारी बदलाव आया है।